नई दिल्ली: ''झारखंड बनेगा… मेरी लाश पर!'' ये शब्द थे बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के। ये दशक था 1990 का और बिहार की राजनीति उबाल मार रही थी। उन दिनों झारखंड का आंदोलन अपने चरम पर पहुंच गया था। बिहार के दक्षिणी जिलों के लोग अपने अलग राज्य की डिमांड कर रहे थे क्योंकि वे मानते थे कि झारखंड की पहचान, उसके संसाधन और उसकी संस्कृति, सब बिहार की छाया में दबे हैं।
लालू क्यों थे अलग राज्य झारखंड बनाने के खिलाफ?
लेकिन उस वक्त के बिहार के सीएम लालू यादव इस मांग के सख्त खिलाफ थे। उनका मानना था कि झारखंड महज जमीन का टुकड़ा नहीं है, ये बिहार की आत्मा है। बिहार के दक्षिणी जिले जहां जंगल, खनिज और कोयले की खानें हैं वो बिहार की आर्थिक रीढ़ हैं। उसे अलग करना, बिहार को तोड़ देने जैसा है।
जब लालू बोले- “झारखंड बनेगा तो मेरी लाश पर!”
सन् 1998 से 1999 के बीच, जब झारखंड को अलग राज्य बनाने की डिमांड संसद और सड़कों दोनों जगह गूंज रही थी तब लालू प्रसाद यादव ने खुलेआम ऐलान किया था, “झारखंड बनेगा तो मेरी लाश पर!” तब उनका ये स्टेटमेंट पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया था। तब किसी ने इसे उनकी जिद कहा था तो कोई इसे बिहार के लिए उनकी वफादारी बताता था।
ऐसे अस्तित्व में आया नया झारखंड राज्य
लेकिन वक्त का पहिया ऐसा घूमा कि अगस्त, 2000 में पार्लियामेंट ने बिहार पुनर्गठन अधिनियम पास कर दिया। ये 15 नवंबर 2000 को लागू हुआ और तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में झारखंड, भारत का 28वां राज्य बन गया। लालू प्रसाद यादव की जिद नहीं चली और इतिहास बन गया। भारत में एक नया राज्य जन्मा और बिहार ने अपना झारखंड खो दिया।
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