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कौन हैं आयुष कुमार? जिन्होंने पहले ही अटेम्प्ट में यूपीएससी में हासिल की 143वीं रैंक, बनेंगे IAS अधिकारी

ग़म्हरिया के रहने वाले आयुष कुमार ने यूपीएससी की परीक्षा पहले ही प्रयास में पास कर ली है। वह आईएएस अधिकारी बनने जा रहे हैं। उनकी इस सफलता से परिवार के लोग खुश हैं।

आयुष कुमार- India TV Hindi
Image Source : REPORTER आयुष कुमार

सरायकेलाः ग़म्हरिया में टायो कालोनी के आयुष कुमार यूपीएससी में 143 रैंक लाकर आईएएस बन गए हैं। उन्हें पहले अटेम्प्ट में ही यह सफलता हासिल हुई है। शुक्रवार को यूपीएससी का रिजल्ट जारी होने के बाद आयुष को मिली इस सफलता से उनके परिजनों समेत क्षेत्र के लोगों में खुशी की लहर है। बताया जा रहा है कि रैंक के अनुसार, आयुष को आईएएस मिलना तय है। किंतु उनकी इच्छा आईपीएस बनने की है। 

प्रोडक्ट डिजाइनर का काम करते हुए की तैयारी

बताया गया कि टायो कंपनी के कर्मचारी प्रदीप कुमार के पुत्र आयुष की स्कूली शिक्षा कॉलोनी परिसर स्थित विद्या ज्योति स्कूल में हुई है। यहां से दसवीं परीक्षा पास करने के उपरांत बिस्टुपुर के चिन्मया विद्यालय से उन्होंने प्लस टू की परीक्षा पास की। वहां से उन्होंने बिलासपुर के गुरुघासी विश्वविद्यालय से 2023 में इंजीनियरिंग डिजाइन में बीटेक किया। उसके बाद बंगलौर में प्रोडक्ट डिजाइनर के पद पर कार्य करते हुए उन्होंने यूपीएससी की तैयारी शुरू की। बताया गया कि महज दो साल की तैयारी में ही उन्होंने इस बड़ी सफलता को हासिल कर ली। 

मूल रूप से बिहार के रहने वाले हैं आयुष

टायो कंपनी के बंद हो जाने से आयुष के पिता प्रदीप कुमार को अपने बच्चों को पढ़ाने में काफी परेशानी हुई। किंतु उन्होंने हिम्मत नहीं हारते हुए अपने बच्चों को बेहतर तालीम देने का फैसला लिया। प्रदीप कुमार अभी दुर्गापुर में कार्यरत है। वह मूलरूप से बिहार के समस्तीपुर के मालती गांव के रहने वाले है। वर्तमान में टायो कालोनी के एच 40 में उनका निवास है, जहां पत्नी रहती है।

जानकारी के मुताबिक, आयुष दो भाई बहन है। आयुष की बड़ी बहन भानजा भी बीटेक इंजीनियर हैं। वह कोलकाता में टीसीएस में कार्यरत है। माता कुमारी रेणुका गृहिणी है। पिता प्रदीप कुमार ने बताया कि आयुष अभी बंगलौर में है। एक दो दिन में ग़म्हरिया पहुंचने की संभावना है। उन्होंने बताया कि परिवार में उनके चार सदस्य है, जो अलग अलग स्थान पर हैं। इसलिए इस बड़े उत्सव को एक साथ नहीं सेलिब्रेट कर पा रहे हैं। बताया कि शुक्रवार की सुबह ही वे दुर्गापुर पहुंचे हैं। यहां आने के बाद रिजल्ट निकलने पर यह खुशी मिली।

रिपोर्ट- गंगाधर पांडे