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Hindi News लाइफस्टाइल हेल्थ रिसर्च: बचपन का तनाव दिमाग को बनाता है मैच्योर

रिसर्च: बचपन का तनाव दिमाग को बनाता है मैच्योर

बचपन में होने वाले नकारात्मक अनुभवों जैसे बीमारी या माता-पिता के तलाक से होने वाले तनाव के कारण किशोरावस्था में दिमाग के कुछ हिस्सों में तेजी से परिपक्वता आती है।

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हेल्थ डेस्क: बचपन में होने वाले नकारात्मक अनुभवों जैसे बीमारी या माता-पिता के तलाक से होने वाले तनाव के कारण किशोरावस्था में दिमाग के कुछ हिस्सों में तेजी से परिपक्वता आती है। एक नए अध्ययन में यह जानकारी सामने आई है। इस अध्ययन में पाया गया है कि इन अनुभवों के कारण प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स और एमिगडला में तेजी से परिपक्वता आती है, जो कि किशोरावस्था में भावनाओं को नियंत्रित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

नीदरलैंड के रेडबांड विश्वविद्यालय की अन्ना टाइबोरोव्सका ने बताया, "यदि आप तनावपूर्ण माहौल में बड़े होते हैं तो क्रमविकास संबंधी परिप्रेक्ष्य से तेजी से परिपक्व होना उपयोगी होता है। हालांकि, यह दिमाग को सुविधाजनक तरीके से वर्तमान वातावरण में समायोजित होने से रोकता है।"शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके विपरीत, अगर जीवन में बाद के वर्षो जैसे स्कूल में साथियों के कारण पैदा होनेवाले तनाव के कारण दिमाग के हिप्पोकैंपस और प्रीफ्रंटल कोर्टेक्स क्षेत्र किशोरावस्था में धीमी गति से परिपक्व होता है। 

टाइबोरोव्सका ने कहा, "दिमाग पर तनाव का मजबूत प्रभाव यह होता है कि इससे असामाजिक व्यक्त्वि के लक्षण विकसित होने का खतरा बढ़ जाता है।"यह अध्ययन साइंटिफिक रिपोर्ट्स नामक पत्रिका में प्रकाशित किया गया है। 

शोधकर्ताओं को यह जानकर आश्चर्य हुआ कि, जीवन में बाद में सामाजिक तनाव किशोरावस्था के दौरान धीमी परिपक्वता का कारण बनता है। टाइबोरोव्सका ने कहा, "दुर्भाग्यवश, इस अध्ययन में हम निश्चित रूप से यह नहीं कह सकते कि तनाव इन प्रभावों का कारण होता है। हालांकि, जानवरों पर किए गए अध्ययन से हम अनुमान लगा सकते हैं कि यह वास्तव में तनाव का कारण है।"

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