Sharad Purnima 2021: शरद पूर्णिमा पर क्यों रखी जाती हैं खुले आसमान के नीचे खीर? जानिए चावल की खीर बनाने की सिंपल विधि
शरद पूर्णिमा की रात को दूध, चावल की खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखने का विधान है। जानिए कारण और खीर बनाने की सिंपल रेसिपी।
शरद पूर्णिमा के दिनचन्द्रमा पृथ्वी के अधिक नजदीक होता है, जिसके चलते चन्द्रमा की रोशनी में उपस्थित तत्वों का सीधा असर पृथ्वी पर पड़ता है और रात को खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखने का भी यही कारण है। जानिए कैसे बनाएं स्वादिष्ट चावल की खीर।
दूध में उपस्थित लैक्टोज और कुछ अन्य तत्व, साथ ही चावल में स्टार्च की उपस्थिति चंद्रमा की किरणों में उपस्थित तत्वों को अवशोषित करने में मदद करते हैं और ये रासायनिक तत्व हमारी रोग-प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने का काम करते हैं। साथ ही हमारे मन और मस्तिष्क को शुद्ध रखने में मदद करते हैं और एक पॉजिटिव एनर्जी का संचार करते हैं।
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खीर बनाने के लिए सामग्री- एक लीटर फुलक्रीम दूध
- आधा कप बासमती चावल
- 1-2 धागे केसर
- एक चौथाई कप चीनी
- थोड़े कटे हुए काजू, बादाम, पिस्ता
- एक चौथाई चम्मच इलायची पाउडर
सबसे पहले चावल को धोकर 1 घंटे के लिए भिगोकर रख दें। इसके साथ ही दो चम्मच दूध में केसर भिगोकर रखें। एक पैन में दूध डालकर गर्म करें। जब दूध में उबाल आने लगे तब इसमें केसर और चावल डालें। इसके बाद गैस धीमी करके इसे पकने दे, जिससे कि ये टेस्टी और क्रीमी हो जाएं। जब ये पक जाएं तो गैस से उतारने के 8 -9 मिनट पहले इसमें चीनी और इलायची पाउडर और सभी मेवे डालकर अच्छी तरह मिला लें। आपकी स्वादिष्ट चावल की खीर बनकर तैयार है।
आचार्य इंदु प्रकाश के अनुसार शरद पूर्णिमा की रात को दूध, चावल की खीर बनाकर चांद की रोशनी में रखने का विधान है। दूध, चावल की खीर बनाकर एक बर्तन में रखकर उसे जालीदार कपड़े से ढक कर चांद की रोशनी में रखना चाहिए और अगली सुबह ब्रह्ममुहूर्त में श्री विष्णु और मां लक्ष्मी को उस खीर का भोग लगाना चाहिए और भोग लगाने के तुरंत बाद उस खीर को प्रसाद के रूप में परिवार के सब सदस्यों में बांट देना चाहिए। इसे चांदी या मिट्टी के बर्तन में रखें तो इसके ज्यादा स्वास्थ्य लाभ मिलेंगे।
