A
Hindi News लाइफस्टाइल जीवन मंत्र आखिर क्यों जरुरी होता है तर्पण, साथ ही जानें पिंडदान करने की पूरी विधि

आखिर क्यों जरुरी होता है तर्पण, साथ ही जानें पिंडदान करने की पूरी विधि

हिंदू धर्म में श्राद्ध का बहुत अदिक महत्व है। इसमें तर्पण और पिंडदान करना जरुरी होता है। इन दोनों के बिना श्राद्ध नहीं हो सकता है और न ही हमारे पूर्वजों को मोक्ष मिलती है। जानिए आखिर क्यों जरुरी है तर्पण साथ ही जाने पिंडदान करने की पूरी विधि के बारें

pinddan- India TV Hindi Image Source : PTI pinddan

धर्म डेस्क: आज तृतीया तिथि वालों का श्राद्ध किया जायेगा। इस तिथि में श्राद्ध करने वाले व्यक्ति को शत्रुओं से छुटकारा मिलता है और पापकर्मों से मुक्ति मिलती है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के अनुसार जिस प्रकार वर्षा का जल सीप में गिरने से मोती, कदली में गिरने से कपूर, खेत में गिरने से अन्न और धूल में गिरने से कीचड़ बन जाता है, उसी प्रकार तर्पण के जल से सूक्ष्म वाष्पकण- देव योनि के पितर को अमृत, मनुष्य योनि के पितर को अन्न, पशु योनि के पितर को चारा व अन्य योनियों के पितरों को उनके अनुरूप भोजन व सन्तुष्टि प्रदान करते हैं। साथ ही जो व्यक्ति तर्पण कार्य पूर्ण करता है, उसे हर तरफ से लाभ मिलता है। नौकरी में तरक्की मिलती है।

श्राद्ध में किए जाने वाले तर्पण में एक लोटे में साफ जल लेकर उसमें दूध, जौ, चावल और गंगा जल मिलाकर तर्पण कार्य करना चाहिए। पितरों का तर्पण करते समय पात्र में जल लेकर दक्षिण दिशा में मुख करके बायां घुटना मोड़कर बैठें और जो जनेऊ धारक हैं, वे अपने जनेऊ को बाएं कंधे से उठाकर दाहिने कंधे पर रखें और हाथ के अंगूठे के सहारे से जल को धीरे-धीरे नीचे की ओर गिराएं। जो अभी मैंने आपको तर्पण की मुद्रा बतायी, उस मुद्रा को पितृ तीर्थ मुद्रा कहते हैं। इसी मुद्रा में रहकर अपने सभी पितरों को तीन-तीन अंजलि जल देना चाहिए। तर्पण हमेशा साफ कपड़े पहनकर श्रद्धा से करना चाहिए। बिना श्रद्धा के धर्म-कर्म तामसी तथा खंडित होते हैं। इसलिए श्रद्धा भाव होना जरूरी है।

ये भी पढ़े:

'इंडिया टीवी' में आने वाला प्रोग्राम 'भविष्यवाणी'  में आचार्य इंदु प्रकाश से जानें कि आकिर क्यों किया जाता है तर्पण साथ ही जानें यह कितने तरीके से किया जा सकता है। इसके साथ ही जानें कैसे करें विधि-विधाने से पिंडदान।

Latest Lifestyle News