धर्म डेस्क: शनि देव शिंगणापुर में महिलाओं के तेल चढाने को लेकर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। रोज कोई न कोई नया विवाद हो रहा है। इसी प्रतिबंध के खिलाफ भूमाता रन रागिनी बिग्रेड की महिलाओं ने मंगलवार के दिन इसके खिलाफ मोर्चा खोल दिया।
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वह इसके खिलाफ प्रर्दशन कर रही थी, लेकिन मंदिर के पुजारियों और मंदिर के संचालक बोर्ड के सदस्यों का कहना है कि हम अपनी पुरानी पंरपरा को चोड़ नही सकते है। इसे हम आज के युग के कारण बदल न सकते है।
दरअसल पिछले साल पुणे की ही एक महिला ने मंदिर के चबूतरे पर चढ़कर शनि देव को तेल चढ़ा दिया था। महिलाओं के लिए वर्जित माने जाने वाले इस कृत्य के बाद मंदिर ट्रस्ट ने मंदिर का शुद्धिकरण करवाया था। बाद में पूजा करने वाली महिला ने तो माफ़ी मांग ली, पर शुद्धिकरण को लेकर महिलाओं ने काफी आक्रोश व्यक्त किया। महाराष्ट्र के शिरडी के पास स्थित एक गांव शिंगणापुर में स्थित शनि देव की आखिर जुडी कहानी क्या है। यह प्रतिमा इस जगह कैसे आई। जानिए इससे जुडी कहानी के बारें में।
माना जाता है कि शिंगणापुर गांव में एक बार बांढ आ गई थी। जिसके कारण धीरे-धीरे सब कुछ डूबने लगा। तो इस बारें में लोगों का कहना है कि एक दैवीय शिला पानी में बह रही थी। जब बाढ़ का पानी कुछ कम हुआ तो एक व्यक्ति ने एक पेड़ में यह पत्थर देखा। तो उसे देखकर उसे लालच आ गया कि इसे बचकर वो अच्छी कमाई कर सकता है। इसी कारण उसने इस दैवीय पत्थर को पेड़ से उतारा और एक नुकीले चीज से उसको तोडने को मारा। जैसे ही उसने मारा इस पत्थर से खून निकलने लगा। वह यह देख भयभीत हो गया और वापस अपने गांव आकर इस बारे में सबको बताया।
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