शोधकर्ताओं का मानना है कि धार्मिक जगहों पर जाने से सामाजिक समर्थन बढ़ता है, धूम्रपान और शराब को तवज्जो नहीं मिलती, अवसाद कम हो जाते हैं, और लोगों के जीवन में ज्यादा आशावादी दृष्टिकोण विकसित होता है।
इस शोध के नतीजों के अनुसार जो महिलाएं सप्ताह में एक बार पूजा करती हैं, उनमें 26% और जो एक सप्ताह से कम बार पूजा करती हैं उनमें मौत का 13% कम खतरा होता है.
वो महिलाएं जो कभी पूजा नहीं करतीं, उनके मुकाबले सप्ताह में एक बार से ज्यादा पूजा करने वाली महिलाओं में, दिल की बीमारी से होने वाली मौत में 27% और कैंसर से होने वाली मौत में 21% कम खतरा होता है।
हालांकि ये शोध ईसाई धर्म मानने वाली महिलाओं पर किया गया था। जाहिर है पश्चिम देशों में ईसाई धर्म को मानने वाले लोगों की संख्या ज्यादा है। वो लोग चर्च जाते हैं, लेकिन अगर इस हिसाब से माना जाये तो पूजा करना, यानि ध्यान लगाने से लोग तनाव से मुक्त तो होते ही हैं। जिसके कारण वो कई बीमरियों के चपेट में आने से बच सकते हैं।
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