वृंदावन का बांके बिहारी मंदिर बहुत मशहूर है। यह मंदिर 'बांके बिहारी' को समर्पित है, जो भगवान कृष्ण का एक रूप हैं। यह मंदिर दुनिया भर में बहुत प्रसिद्ध है और यहाँ हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं, खासकर जन्माष्टमी और होली जैसे त्योहारों पर। त्योहारों के आलाव भी इस मंदिर में आने के लिए लोगों की खूब भीड़ लगती है। बांके बिहारी का दर्शन करने के लिए इतने लोग आते हैं कि मंदिर के प्रांगड़ से लेकर बाहर की गलियों तक श्रद्धालुओं का जमघट देखते ही बनता है। ऐसे भीड़भाड़ को देखकर कई बार लोग यहाँ जाने का प्लान कैंसल कर देते हैं। लेकिन क्या आपको पता है कि कुछ समय और महीने ऐसे होते हैं, जब मंदिर में अपेक्षाकृत कम भीड़ होती है और आप आराम से बांके बिहारी के दर्शन कर सकते हैं। चलिए जानते हैं किस समय जाने पर आप भगवान कृष्ण के इस खूबसूरत रूप का दर्शन कर सकते हैं?
भीड़ से बचने के लिए दर्शन का सही समय
बिना भीड़भाड़ के दर्शन के लिए सुबह का वक्त सबसे शांत माना जाता है। मंदिर खुलते ही दर्शन करने जाएँ, तो भीड़ अभी बाहर पूरी तरह से जुटी नहीं होती। शाम-दर्शन के समय कम भीड़ में भगवान की झलक मिल सकती है। सप्ताह के दिनों जैसे सोमवार-गुरुवार में वीकेंड की तुलना में कम लोग आते हैं इसलिए आप इस दिन का चुनाव भी कर सकते हैं।
साल के कौन-से महीने हैं अनुकूल?
नवंबर से लेकर फरवरी यह वह समय है जब यहां का मौसम सुहावना होता है और भीड़ कम होती है। त्योहारों के बाद भी श्रद्धालुओं की भीड़ में कमी देखने को मिलती है तो आप इस समय भी जा सकते हैं। साथ ही मानसून का समय तापमान ज़्यादा होता जिस वजह से उमस अधिक होती है तो अगर आप बिना भीड़भाड़ के दर्शन करना चाहते हैं तो यह समय भी उपयुक्त है।
दर्शन के दौरान इन बातों का भी रखें ध्यान:
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सुबह के समय मंदिर खुलने के थोड़े ही देर बाद वहाँ पहुंचने का प्रयास करें ताकि भीं न मिले।
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लेकिन अगर आपको मंदिर की गलियों में भीड़ मिल गई है तो जल्दी चलने की बजाय धीरे धीरे चलें। इससे भीड़-भाड़ में फँसे बिना शांति महसूस होगी।
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देर सुबह या शाम के समय लोगों की संख्या कम होती है. लेकिन फिर भी कतारों में समय लग सकता है, इसलिए थोड़ा पानी और हल्का नाश्ता अपने साथ रखें।
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मंदिर के कुछ हिस्सों में फ़ोटोग्राफ़ी की मनाही होती है, इसलिए मंदिर नियमों की जानकारी पहले से ले लें।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।
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