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देवदार के घने जंगलों के बीच बसा है महादेव का ये मंदिर, आप भी हैं शिव भक्त तो बना लें घूमने का प्लान

देवदार के घने जंगलों के बीच स्थित महादेव का यह मंदिर अपनी प्राकृतिक सुंदरता और आध्यात्मिक ऊर्जा के लिए जाना जाता है। चलिए जानते हैं यहां कब और कैसे जाएं?

महादेव - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV महादेव

उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल जिले में स्थित 'ताड़केश्वर महादेव मंदिर' भक्तों और यात्रियों के लिए किसी स्वर्ग से कम नहीं है। महादेव का यह मंदिर भारत में भगवान शिव का प्राचीन सिद्धपीठ है। देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच बसा यह मंदिर अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए जाना जाता है। लैंसडाउन से इस मंदिर की दूरी करीब 38 किलोमीटर है। अगर आप लैंसडाउन घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो ताड़केश्वर महादेव मंदिर की यात्रा जरूर करें। चलिए जानते हैं यहां कब और कैसे पहुंचें?

देवदार के पेड़ों से घिरा है यह मंदिर:

ताड़केश्वर महादेव मंदिर, समुद्र तल से 1,800 मीटर की ऊँचाई पर देवदार और चीड़ के घने जंगलों के बीच बसा है। अगर आप भी शहर की भागदौड़ से दूर कुछ समय शांति में बिताना चाहते हैं, तो यह जगह आपके लिए परफेक्ट हो सकती है। यहां पहुंचते ही ठंडी हवाएं, जंगलों की खुशबू और मंदिर की दिव्यता मन को मंत्रमुग्ध कर देती है। 

Image Source : INDIA TVताड़केश्वर मंदिर

प्रकृति प्रेमियों के लिए है खूबसूरत:

ताड़केश्वर मंदिर के आसपास का नजारा बेहद खूबसूरत है। यहां का शांत वातावरण मेडिटेशन और प्रकृति प्रेमियों को खास तौर पर आकर्षित करता है। आप यहां ट्रैकिंग, फोटोग्राफी और प्रकृति के बीच सुकून भरे पल भी बिता सकते हैं। अगर आप यहां रुक कर मेडिटेशन करना चाहते हैं तो मंदिर परिसर के पास आश्रम है और यहां रुकने की सुविधा भी मिलती है।

Image Source : INDIA TVपत्थरों के मीनार

घर की मनोकामना होती है पूरी:

ताड़केश्वर महादेव मंदिर में पत्थरों के ऊपर पत्थर रखकर मीनार बनाने की परंपरा है। ऐसी मान्यता है कि जो लोग इस प्रकार पत्थरों को संतुलित करके अपने सपनों के घर का मॉडल बनाते हैं, उनकी इच्छा पूरी होती है और उन्हें अपना घर बनाने का आशीर्वाद मिलता है

कब जाएं ताड़केश्वर मंदिर घूमने?

 अगर आपको तपती गर्मी में ठंड का एहसास चाहिए तो आप यहां अप्रैल से लेकर जून के बीच आ सकते हैं। इसके अलावा सावन के महीने और महाशिवरात्रि के दौरान यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं। इस दौरान मंदिर में विशेष उत्सव और भारी भीड़ होती है, जो बहुत आकर्षक है।

 

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