अवैध माइनिंग के एक मामले में प्रशासनिक लापरवाही भारी पड़ गई। छिंदवाड़ा कलेक्टर ने बिना ठोस जांच किए ट्रक के गलत मालिक पर कार्रवाई कर दी। जबलपुर हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले को “लापरवाह और यांत्रिक” कार्रवाई मानते हुए आदेश रद्द कर दिया और ₹50,000 का हर्जाना भी ठोक दिया। अदालत ने साफ कहा कि केवल अधीनस्थ अधिकारी की रिपोर्ट पर आंख मूंदकर फैसला लेना न्यायिक प्रक्रिया का उल्लंघन है।
जबलपुर हाईकोर्ट में यह मामला तब पहुंचा जब चौरई (छिंदवाड़ा) में एक ट्रक को अवैध खनिज परिवहन करते हुए पकड़ा गया। पूछताछ में ड्राइवर ने ट्रक का मालिक सारंग रघुवंशी बताया और इसी एक बयान के आधार पर पूरा केस तैयार कर लिया गया। बाद में इसी आधार पर कलेक्टर ने वाहन राजसात करने और जुर्माना लगाने का आदेश पारित कर दिया। जिम्मेदार अधिकारियों ने ट्रक के रजिस्टर्ड मलिक की जानकारी निकालना तक की जहमत नहीं उठाई।
असली मालिक की पहचान तक नहीं की
सुनवाई के दौरान यह स्पष्ट हुआ कि प्रशासन ने न तो वाहन के रजिस्ट्रेशन दस्तावेजों की जांच की और न ही वास्तविक मालिक बलवीर सिंह से संपर्क किया। कोर्ट ने पाया कि पूरी कार्रवाई केवल मौखिक बयान पर आधारित थी, जो प्रशासनिक प्रक्रिया की गंभीर खामी को दर्शाता है। मामले की सुनवाई जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की डिवीजन बेंच ने की। कोर्ट ने कलेक्टर की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि एक वरिष्ठ आईएएस अधिकारी से अपेक्षा की जाती है कि वह तथ्यों की स्वतंत्र जांच करे, न कि अधीनस्थ की रिपोर्ट को आंख मूंदकर स्वीकार करे।
छिंदवाड़ा कलेक्टर पर 50 हजार का हर्जाना
हाईकोर्ट ने 27 जनवरी 2025 को पारित कलेक्टर के आदेश को अवैध और अस्थिर बताते हुए निरस्त कर दिया। साथ ही राज्य सरकार को निर्देश दिया गया कि वह याचिकाकर्ता को 50,000 रूपये का हर्जाना दे, जिससे उसे हुए नुकसान की भरपाई हो सके। अदालत ने अपने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि यह राशि सरकारी खजाने से नहीं बल्कि उन अधिकारियों से वसूली जाएगी, जिनकी लापरवाही के कारण यह गलत निर्णय लिया गया। कोर्ट का यह रुख प्रशासनिक जवाबदेही तय करने की दिशा में एक मजबूत संदेश माना जा रहा है।
अब बिना जांच कार्रवाई नहीं चलेगी
इस फैसले के जरिए हाईकोर्ट ने साफ संकेत दिया है कि अवैध माइनिंग जैसे गंभीर मामलों में भी जल्दबाजी या लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। न्यायालय ने यह स्थापित किया कि अर्ध-न्यायिक शक्तियों का उपयोग तथ्यों की पूरी जांच और निष्पक्षता के साथ ही किया जाना चाहिए, वरना अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
(जबलपुर से देबाजीत देब की रिपोर्ट)
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