मध्य प्रदेश में जिलों, शहरों, गांवों और इमारतों का नाम बदलने का सिलसिला अभी थमा नहीं है। एक के बाद एक सरकार जिलों, शहरों, गांवों, और इमारतों के नाम बदल रही है। ताजा मामला अलीराजपुर जिले का है जिसका नाम सरकार ने बदलकर आलीराजपुर कर दिया है। राज्य सरकार के राजस्व विभाग ने बकायदा इसकी अधिसूचना भी जारी कर दी है। जाहिर है कि सरकार के इस कदम पर सियासत भी शुरू हो गई है।
लगातार बदले जा रहे नाम
शेक्सपियर ने भले ही कहा हो आखिर नाम में क्या रखा है लेकिन एमपी की 22 सालों से चल रही भाजपा सरकार शेक्सपियर की इस बात से मुतमईन नजर नहीं आती है। यही वजह है बीते 22 सालों में भाजपा की सरकार एक के बाद एक तमाम मुस्लिम नाम वाले जिलों, शहरों, गांवों और इमारतों के नाम बदलते जा रही है। 2008 में झाबुआ जिले से काटकर बना अलीराजपुर जिला भी अब मध्य प्रदेश सरकार के नए आदेश के बाद आलीराजपुर के नाम से जाना जाएगा।
क्यों बदला गया नाम?
दरअसल, अलीराजपुर जिले के नाम को बदलने की मांग 2012 से शुरू हुई थी। जिले की लोगों की सांस्कृतिक भावनाओं और इसके सही उच्चारण आलीराजपुर का हवाला देते हुए एक स्थानीय संगठन ने तत्कालीन मंत्री अंतर सिंह आर्य की अध्यक्षता में हुई जिला योजना समिति की बैठक में ज्ञापन सौंपा था। इसे समिति ने सर्वसम्मति से पास किया था। स्थानीय संगठनों और लोगों की मांग पर राज्य सरकार ने ये प्रस्ताव गृह मंत्रालय को भेजा था, जिस पर अब मंजूरी मिली है, लेकिन कांग्रेस के वरिष्ठ नेता नाम बदलने के कदम को राजनीति बता रहे हैं।
Image Source : Reporterअलीराजपुर का नाम बदलने की अधिसूचना जारी।
आपको बता दें कि भाजपा की 22 सालों के शासनकाल में यह पहली बार नहीं जब सरकार ने इस तरह नाम बदल हो इससे पहले भी सरकार जिलों शहरों और गांव के नाम बदल चुकी है।
शिवराज सिंह चौहान की कार्यकाल में बदले नाम
- इस्लामनगर का नाम रखा था जगदीशपुर
- नसरुल्लागंज का भेरुन्दा,
- बाबई का नाम माखन नगर
- होशंगाबाद शहर और संभाग का नाम बदलकर किया था नर्मदापुरम
- हबीबगंज स्टेशन का नाम कमलापति स्टेशन
सीएम मोहन यादव द्वारा बदले गए नाम
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने जनवरी 2025 में उज्जैन के बड़नगर में मौलाना गांव का नाम बदलते हुए कहा था यह नाम लिखते वक्त पेन अटकता है। इसी दौरान उन्होंने उज्जैन जिले के मौलाना गांव का नाम बदलते हुए विक्रम नगर, गजनी खेड़ी का नाम बदलकर चामुंडा माता, जहांगीरपुर का नाम बदलकर जगदीशपुर किया था। यही नहीं इससे पहले मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव शाजापुर जिले के 11 नाम बदलने की घोषणा भी कर चुके हैं।
- मोहम्मदपुर मछनाई- मोहनपुर
- ढाबला हुसैनपुर– ढाबला राम
- मोहम्मदपुर पवाड़िया– रामपुर पवाड़िया
- खजूरी अलाहदाद– खजूरी राम
- हाजीपुर– हीरापुर गांव
- निपानिया हिसामुद्दीन– निपानिया देव
- रीछड़ी मुरादाबाद– रिछड़ी
- खलीलपुर- रामपुर
- घट्टी मुख्तयारपुर- घट्टी
- ऊंचोद– ऊंचावद
- शेखपुर बोंगी- अवधपुरी
कांग्रेस ने क्या कहा?
अलीराजपुर का नाम बदलते ही इस पर सियासत भी शुरू हो गई है कांग्रेस के धर्मस्व मंत्री रहे वरिष्ठ नेता पीसी शर्मा कहते हैं- "कानून व्यवस्था ठप्प है, रोजगार नहीं है, बेरोजगारी चरम पर है, महंगाई है और सरकार नाम बदल रही है।" लेकिन भाजपा नाम बदलने की कवायद को सही बता रही है। भोपाल हुजूर से भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा कहते हैं- "हमने नाम नहीं बदला। जो मूल दस्तावेज में नाम था उसे लाकर रख दिया है। नवाबों और अंग्रेजों के दबाव का कोई भी नाम हिंदुस्तान बर्दाश्त नहीं करेगा।"
नाम में क्या रखा है ये सवाल मध्यप्रदेश की राजनीति में अब बेमानी साबित हो रहा है। अलीराजपुर से आलीराजपुर तक, होशंगाबाद से नर्मदापुरम तक नाम बदले जा रहे हैं। लेकिन असली सवाल वही है कि क्या नाम बदलने की इस राजनीति का फायदा प्रदेश के विकास रोजगार स्वास्थ्य सड़क जैसी सुविधाओं के मामलों पर होगा।
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