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पैर में टैग, पीठ पर कैमरा... जब ग्रामीणों के बीच आ बैठा दुर्लभ हिमालयन गिद्ध, VIDEO में देखें

गिद्ध कुछ समय तक गांव के आस-पास मौजूद रहा। जैसे ही लोगों ने उसके शरीर पर लगे उपकरणों को देखा, उसे देखने के लिए आस-पास के क्षेत्रों से भी लोग पहुंचने लगे।

गांव में पहुंचा दुर्लभ हिमालयन गिद्ध- India TV Hindi
Image Source : REPORTER INPUT गांव में पहुंचा दुर्लभ हिमालयन गिद्ध

मध्य प्रदेश के डिंडौरी जिले के अमरपुर वन परिक्षेत्र के अंतर्गत आने वाले उमरिया गांव में एक दुर्लभ 'हिमालयन गिद्ध' अचानक आकर बैठ गया। अमूमन गगनचुंबी बर्फीले पहाड़ों पर रहने वाले इस पक्षी को अपने बीच पाकर ग्रामीणों की उत्सुकता का ठिकाना नहीं रहा।

कैमरा और टैग देखकर उमड़ी भीड़

यह गिद्ध तब और ज्यादा आकर्षण का केंद्र बन गया, जब लोगों ने गौर किया कि इसके पैर में एक पहचान संबंधी टैग लगा हुआ है और उसकी पीठ पर कैमरे जैसा कोई आधुनिक उपकरण बंधा हुआ है। इस अनोखे पक्षी को देखने के लिए देखते ही देखते आस-पास के इलाकों से भी भारी भीड़ जुट गई। ग्रामीणों ने इस दौरान गिद्ध को पानी पिलाया और तत्काल इसकी सूचना वन विभाग को दी। कई ग्रामीणों ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर किया, जो तेजी से वायरल हो रहा है।

वैज्ञानिक अनुसंधान का हिस्सा है यह गिद्ध: वन विभाग

सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम हरकत में आई और गिद्ध की गतिविधियों पर पैनी निगरानी रखनी शुरू कर दी। वन विभाग के आला अधिकारियों के मुताबिक, यह हिमालयन गिद्ध किसी विशेष वन्यजीव निगरानी एवं अनुसंधान परियोजना का हिस्सा है। पैर में लगा टैग और पीठ पर लगा उपकरण वैज्ञानिकों द्वारा इसकी उड़ान, प्रवासी रास्तों और गतिविधियों की जानकारी जुटाने के लिए लगाया गया है।

मंडला के जंगलों की ओर भरी उड़ान

वन विभाग ने बताया है कि निगरानी के दौरान यह दुर्लभ पक्षी डिंडौरी क्षेत्र से आगे बढ़कर अब पड़ोसी जिले मंडला के घने जंगलों की ओर उड़ गया है। विभाग की टीम लगातार सैटेलाइट और जमीनी स्तर पर उसकी लोकेशन को ट्रैक कर रही है, ताकि वह पूरी तरह सुरक्षित रहे।

मैदानी इलाकों में दिखना बेहद दुर्लभ

वन्यजीव विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयन गिद्ध मुख्य रूप से ऊंचे पर्वतीय और ठंडे क्षेत्रों में पाए जाते हैं। मैदानी या ग्रामीण रिहाइशी इलाकों के पास इनका आना बेहद दुर्लभ माना जाता है। डिंडौरी के उमरिया गांव में इसकी यह मौजूदगी न केवल ग्रामीणों के लिए एक अनूठा और यादगार अनुभव साबित हुई, बल्कि इसने स्थानीय लोगों के बीच वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाने का एक बड़ा संदेश भी दिया है।

(रिपोर्ट- दीपक कुमार नामदेव)

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