उज्जैन में सड़क चौड़ीकरण के दौरान मंदिर हटाने को लेकर जमकर बवाल हुआ। यहां सड़क चौड़ीकरण की जद में आ रहे एक मकान में रहने वाले लोगों का विवाद क्षेत्र के अन्य लोगों से हो गया। दोनों पक्षों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस दौरान एक पक्ष ने पत्थर फेंकना शुरू कर दिया। पथराव में एक पुलिसकर्मी के सर में चोट आई है। पुलिस ने हल्का बल प्रयोग कर भीड़ को तीतर-बितर किया। इस दौरान विरोध कर रहे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को क्षेत्रवासियों ने भगाया।
उज्जैन शहर में सिहस्थ 2028 के लिए कई मार्गों का चौड़ीकरण किया जा रहा है। इसी के तहत उज्जैन के आजाद नगर से दो तालाब तक रोड का चौड़ीकरण किया जाना है, जिसके तहत पंचमपुरा चौराहे पर कालिकमाता मंदिर को नगर निगम की टीम जेसीबी और पोकलेन की मदद से तोड़ रही थी। इस दौरान बजरंग दल के कार्यकर्ता पहुंचे और मंदिर तोड़ने का विरोध करने लगे।
स्थानीय लोगों की सहमति से तोड़ा जा रहा था मंदिर
रहवासियों की सहमति से ही मंदिर को अन्य स्थान पर बनाए जाने के बाद तोड़ा जा रहा था। इसी दौरान चौड़ीकरण की जद में आ रहे एक मकान में रहने वाले लोग पहुंचे और उन्होंने मंदिर तोड़ने का विरोध किया, जिस पर अन्य रहवासियों से उनका विवाद हो गया। विवाद में दोनों पक्षों के बीच मारपीट शुरू हो गई। मारपीट के दौरान एक पक्ष ने भीड़ पर पत्थर बरसाना शुरू कर दिया, जिसके कारण एसआई अंकित बरोध के सर में चोट आई है। घटना के बाद तीन थानों का पुलिस बल मौके पर लगाया गया है, जिसके बाद मंदिर को तोड़ने की कार्रवाई की गई। इस दौरान रहवासियों ने मंदिर तोड़ने का विरोध कर रहे बजरंग दल के कार्यकर्ताओं को खदेड़ दिया।
पत्थरबाजों पर होगी कार्रवाई
घटना की जानकारी लगने के बाद पुलिस ने क्षेत्र में बड़ी संख्या में पुलिस बल लगा दिया। इसके बाद अतिक्रमण को तोड़ने की कार्रवाई की गई। पुलिस ने पथराव करने वाले कुछ लोगों की पहचान की है। सीएसपी दीपिका शिंदे ने बताया कि मार्ग चौड़ीकरण के दौरान मंदिर को हटाया जा रहा था। इस दौरान दोनों पक्षों के बीच विवाद हो गया, जिसमें एक पुलिसकर्मी भी घायल हुआ है। घटना की जांच की जा रही है जो भी आरोपी होंगे उन पर कार्रवाई की जाएगी।
(उज्जैन से प्रेम डोडिया की रिपोर्ट)
यह भी पढ़ें-
पश्चिम बंगाल में चुनाव आयोग का बड़ा एक्शन, 12 पुलिस अधिकारियों का किया तबादला, जानिए किसे कहां भेजा गया?
जम्मू-कश्मीर में टोरनाडो के बाद भूकंप के झटके, धरती की सतह से 10 किलोमीटर नीचे था केंद्र