महाराष्ट्र में ओवैसी को इग्नोर करना अब नामुमकिन? जानें क्यों अहम हैं नगर निगम चुनाव के नतीजे
महाराष्ट्र नगर निगम चुनावों में AIMIM ने 125 से ज्यादा सीटें जीतकर बड़ा राजनीतिक संदेश दिया है। मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत पकड़ बनाते हुए ओवैसी अब राज्य की राजनीति में अनदेखी न की जा सकने वाली ताकत बन गए हैं, जिससे कांग्रेस, NCP और SP को चुनौती मिली है।

मुंबई: महाराष्ट्र के नगर निगम चुनावों को मिनी विधानसभा चुनाव माना जा रहा था। इसमें असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने सबको चौंकाते हुए शानदार प्रदर्शन किया है। पार्टी ने 125 से ज्यादा सीटों पर जीत हासिल की है। कुल 29 नगर निगमों में से 13 में AIMIM के उम्मीदवारों ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई है। संभाजीनगर में AIMIM को सबसे ज्यादा 33 सीटों पर जीत मिली है, जबकि मालेगांव में 20 और अमरावती में 15 सीटें हासिल हुई हैं। ओवैसी की इस जीत ने महाराष्ट्र की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दिए हैं, और आज हम इन्हीं बदलावों की चर्चा करेंगे।
मुस्लिम बहुल इलाकों में AIMIM ने बनाई मजबूत पकड़
AIMIM ने मुस्लिम बहुल इलाकों में मजबूत पकड़ बनाई है। मुंबई में मुस्लिम बहुल 8 सीटों पर पार्टी ने कब्जा किया है। यहां तक कि समाजवादी पार्टी के गढ़ माने जाने वाले मानखुर्द इलाके में भी AIMIM ने सेंध लगा दी है। पार्टी ने सोलापुर में 8 सीटें, मालेगांव में 20, नागपुर में 6, संभाजीनगर में 33, अहमदनगर में 2, अमरावती में 15, जालना में 2, धुले में 10, नांदेड में 14, अकोला में 3, ठाणे में 5 और चंद्रपुर में 1 सीट पर जीत दर्ज की है। पार्टी ने इन चुनावों में अपनी मजबूत पकड़ साबित कर दी है। पार्टी ने कुल 13 नगर निगमों में सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की है, जो महाराष्ट्र में इसके बढ़ते प्रभाव को दिखाता है।
ओवैसी को अब इग्नोर नहीं किया जा सकता
इन चुनावी नतीजों के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में असदुद्दीन ओवैसी और उनकी पार्टी AIMIM को इग्नोर करना नामुमकिन हो गया है। पार्टी ने 125 से ज्यादा सीटों पर कब्जा किया है और राज्य की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में उभरी है। पहले AIMIM को मुख्य रूप से हैदराबाद तक सीमित माना जाता था, लेकिन अब महाराष्ट्र में 13 नगर निगमों में उसकी मौजूदगी ने दिखा दिया कि वह स्थानीय मुद्दों पर मुस्लिम वोटरों को एकजुट करने में कामयाब हुई है। साफ है कि अगर बड़े दल ओवैसी को नजरअंदाज करेंगे तो मुस्लिम वोट बैंक बंट सकता है, और करीब 12 फीसदी की मुस्लिम आबादी वाले महाराष्ट्र में चुनावी नतीजों को प्रभावित कर सकता है।
किन पार्टियों के लिए खतरा है AIMIM का उभार?
AIMIM का यह उभार कई पार्टियों के लिए खतरे की घंटी है। कांग्रेस, NCP और समाजवादी पार्टी को ओवैसी के उभार से मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है, क्योंकि महाराष्ट्र की मुस्लिम बहुल सीटों पर अब तक इन्हीं पार्टियों को मुसलमानों के ज्यादातर वोट मिलते आए थे। मुंबई, ठाणे और सोलापुर जैसे शहरों में मुस्लिम वोटरों का एक हिस्सा अब AIMIM की तरफ शिफ्ट होता दिख रहा है। नांदेड और अमरावती जैसे इलाकों में मुस्लिम वोटर कांग्रेस के साथ थे, लेकिन अब AIMIM ने इन इलाकों में भी सीटें जीतकर अपनी पकड़ बना ली है।
AIMIM की जीत से सियासत में क्या बदलाव आएगा?
AIMIM की इस जीत से महाराष्ट्र की सियासत में कई बड़े बदलाव आएंगे। सबसे पहले, मुस्लिम वोट बैंक अब बंट जाएगा, जो पहले कांग्रेस, SP या NCP के साथ था। इससे गठबंधन की राजनीति बदल जाएगी और बड़े दल AIMIM से समझौते की तरफ देखना शुरू करेंगे। दूसरा, स्थानीय स्तर पर नगर निगमों में AIMIM की मौजूदगी से मुस्लिम बहुल इलाकों में पार्टी का प्रभाव और बढ़ेगा। तीसरा, राज्य की राजनीति में ध्रुवीकरण बढ़ सकता है, जहां ओवैसी की पार्टी मुस्लिम अधिकारों की आवाज बन सकती है। कुल मिलाकर, महाराष्ट्र अब बहु-ध्रुवीय राजनीति की तरफ बढ़ेगा, जहां AIMIM एक महत्वपूर्ण खिलाड़ी बनकर उभरेगी।