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Hindi News महाराष्ट्र BMC चुनाव में 'परिवारवाद' का बोलबाला, हर तीसरे वार्ड में नेता के रिश्तेदार, कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी

BMC चुनाव में 'परिवारवाद' का बोलबाला, हर तीसरे वार्ड में नेता के रिश्तेदार, कार्यकर्ताओं में भारी नाराजगी

मुंबई महानगरपालिका चुनाव से पहले सभी प्रमुख राजनीतिक दलों में परिवारवाद को लेकर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो गए हैं। अलग-अलग दलों द्वारा घोषित उम्मीदवारों की सूचियों में नेताओं के परिजनों को बड़ी संख्या में टिकट दिए गए हैं।

BMC चुनाव में अपनों पर मेहरबान पार्टियां- India TV Hindi Image Source : FILE (PTI) BMC चुनाव में अपनों पर मेहरबान पार्टियां

मुंबई: देश की सबसे अमीर महानगरपालिका BMC के चुनाव का बिगुल बजते ही मुंबई की राजनीति में परिवारवाद का जिन्न एक बार फिर बाहर आ गया है। इस बार किसी एक दल पर नहीं, बल्कि बीजेपी, कांग्रेस, शिवसेना (शिंदे और यूबीटी) और एनसीपी समेत तमाम प्रमुख दलों पर अपनों को रेवड़ियां बांटने के आरोप लग रहे हैं। आंकड़ों की मानें तो करीब 10% सीटों पर दिग्गजों के रिश्तेदारों का कब्जा है। यानी मुंबई के 227 वार्डों में लगभग हर तीसरे वार्ड में एक उम्मीदवार किसी न किसी राजनीतिक परिवार से जुड़ा हुआ है।

बीजेपी में परिवारवाद पर सबसे ज्यादा चर्चा

अक्सर कांग्रेस पर परिवारवाद का हमला करने वाली बीजेपी खुद अपनों के घेरे में है। दक्षिण मुंबई की हाई-प्रोफाइल कोलाबा सीट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। यहां 6 में से 3 वार्डों में महाराष्ट्र विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के परिजनों को टिकट मिला है।

  1. वार्ड 225: हर्षिता नार्वेकर (भाभी)
  2. वार्ड 226: मकरंद नार्वेकर (भाई)
  3. वार्ड 227: गौरवी नार्वेकर (चचेरी बहन) 

ये सभी उम्मीदवार महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष राहुल नार्वेकर के करीबी परिजन हैं। नामांकन के दौरान रथ, ढोल-नगाड़ों और सैकड़ों कार्यकर्ताओं के साथ पूरा नार्वेकर परिवार मौजूद रहा, जिसकी तस्वीरें और वीडियो चुनावी चर्चा का केंद्र बन गए।

हालांकि, राहुल नार्वेकर ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा, "परिवारवाद का आरोप गलत है। सभी को टिकट मेरिट के आधार पर मिला है। यह कहना कि इन्हें टिकट मेरे कारण मिला, पूरी तरह बेबुनियाद है।"

शिवसेना के दोनों गुटों में भी 'रिश्तेदारी' को प्राथमिकता

शिवसेना के दोनों धड़ों में भी पुराने वफादारों के बजाय नेताओं के बच्चों और करीबियों को तरजीह मिली है। 

  1. शिंदे गुट: विधायक प्रकाश सुर्वे के बेटे राज सुर्वे और सांसद रविंद्र वायकर की बेटी जोगेश्वरी से मैदान में हैं।
  2. यूबीटी गुट: विधायक हारून खान की बेटी सना खान और सुनील प्रभु के करीबियों को टिकट मिलने से जमीनी कार्यकर्ताओं में उबाल है। 'मातोश्री' के बाहर रोते-बिलखते उन कार्यकर्ताओं की तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनके पास कोई 'गॉडफादर' नहीं था।

NCP और कांग्रेस: यहां भी वही हाल

  1. NCP (अजित पवार): कुर्ला में नवाब मलिक के परिवार (बुशरा खान, सईदा और कप्तान मलिक) को मिले टिकटों पर सुनील तटकरे ने सफाई दी कि ये सभी अनुभवी जनप्रतिनिधि हैं।
  2. कांग्रेस: कलीना और अंधेरी वेस्ट में पूर्व विधायकों और महासचिवों की पत्नियों व बच्चों को टिकट थमाए गए हैं।

अबू आज़मी का ऑफर?

समाजवादी पार्टी के महाराष्ट्र अध्यक्ष अबू आज़मी ने इस स्थिति का फायदा उठाते हुए भाजपा पर उत्तर भारतीयों की अनदेखी का आरोप लगाया। आज़मी ने फिल्मी अंदाज में बागियों को न्योता देते हुए कहा, "जब कोई तुम्हारा हृदय तोड़ दे... तब तुम मेरे पास आना प्रिये, मेरा दर खुला है।"

आज़मी ने कहा ऐसे नाराज निर्दलीय उम्मीदवारों को समाजवादी पार्टी समर्थन देगी। आज़मी ने कहा ऐसे कुछ बागी मेरे संपर्क में हैं और उन्होंने आज मुझसे एबी फॉर्म भी लिए हैं। उन्होंने दावा किया कि बीजेपी के लिए लाठियां खाने वाले उत्तर भारतीय कार्यकर्ताओं को टिकट के समय ठगा गया है और अब सपा ऐसे बागियों को समर्थन देने के लिए तैयार है।

कार्यकर्ताओं की बगावत

जमीनी स्तर पर काम करने वाले कार्यकर्ता खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। कई वार्डों में निर्दलीय नामांकन और विरोध प्रदर्शनों ने पार्टियों की नींद उड़ा दी है।

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