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महाराष्ट्र विधानपरिषद चुनाव में अचानक बदल गई तस्वीर, उद्धव ठाकरे ने किया चुनाव मैदान से हटने का फैसला

महाराष्ट्र में विधानपरिषद के चुनाव में अचानक तस्वीर बदल गई है। शिवसेना यूबीटी के प्रमुख और राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया है। इसके साथ ही MVA में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई है।

Uddhav Thackeray Maharashtra MLC election- India TV Hindi
Image Source : PTI उद्धव ठाकरे ने किया MLC चुनाव से हटने का फैसला।

महाराष्ट्र विधान परिषद चुनाव से पहले सियासी तस्वीर अचानक बदल गई है। नामांकन की अंतिम तारीख नजदीक आते ही उद्धव ठाकरे ने खुद चुनाव मैदान से हटने का फैसला किया, जिसके बाद आदित्य ठाकरे ने पूर्व विधान परिषद नेता प्रतिपक्ष अंबादास दानवे को शिवसेना (यूबीटी) का उम्मीदवार घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही महाविकास अघाड़ी (MVA) में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आ गई और निर्विरोध चुनाव की उम्मीद लगभग खत्म होती दिखाई दे रही है।

कांग्रेस उतारेगी उम्मीदवार

कांग्रेस ने पहले ही साफ कर दिया था कि अगर उम्मीदवार खुद उद्धव ठाकरे नहीं होंगे, तो पार्टी अपनी दावेदारी पेश करेगी। दानवे के नाम की घोषणा के बाद प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने कहा, “कांग्रेस विधान परिषद के लिए अपना उम्मीदवार उतारेगी।” वहीं एनसीपी (एसपी) के प्रदेश अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने संतुलित रुख अपनाते हुए कहा कि इस पर मिलकर फैसला लिया जाएगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अगर चुनाव निर्विरोध हो तो बेहतर रहेगा।

एकनाथ शिंदे के हाथ में फैसला 

उधर महायुति गठबंधन ने आक्रामक रणनीति बनानी शुरू कर दी है। मंत्री उदय सामंत ने संकेत दिया कि मुकाबला अब टलने वाला नहीं है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं लगता कि चुनाव निर्विरोध होगा। अगर नौ सीटों पर दस उम्मीदवार होते हैं, तो भी हमारे सभी नौ उम्मीदवार जीतेंगे।” शिवसेना (शिंदे गुट) के नेता संजय निरुपम ने भी कहा कि निर्दलीयों के समर्थन के आधार पर एक अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने पर विचार हो रहा है।

इस पूरे घटनाक्रम में अंतिम फैसला उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के हाथ में है, जिन्होंने अपने ‘नंदनवन’ बंगले पर आज रात अहम बैठक बुलाई है, जहां इस संभावित “गेम-चेंजर” रणनीति को अंतिम रूप दिया जाएगा।

सदन में संख्या बल क्या है?

संख्या बल की बात करें तो महायुति की स्थिति मजबूत नजर आ रही है। 288 विधायकों वाले सदन में एक सीट जीतने के लिए करीब 29 वोट चाहिए। ऐसे में MVA के पास मौजूद करीब 49 वोट से वह केवल एक सीट सुरक्षित कर सकती है। वहीं महायुति के पास 234-236 विधायकों का समर्थन है, जिससे वह आसानी से आठ सीटें जीत सकती है और दसवां उम्मीदवार उतारकर नौवीं सीट पर भी कब्जा करने की रणनीति बना रही है। इससे MVA को बड़ा झटका लग सकता है।

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