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महाराष्ट्र: सभी नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव नतीजों की तारीख बदली, बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने सुनाया फैसला

महाराष्ट्र के सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव के नतीजे अब 2 दिसंबर की जगह 21 दिसंबर को आएंगे। राज्य में 20 दिसंबर तक चुनाव आचार संहिता लागू रहेगी। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने ये फैसला आया है।

Maharashtra- India TV Hindi Image Source : ANI/REPRESENTATIVE PIC सभी नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव नतीजों की तारीख बदली

मुंबई: महाराष्ट्र के सभी नगर परिषद और नगर पंचायत चुनाव के नतीजे अब 2 दिसंबर को नहीं आएंगे। बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच ने ये फैसला सुनाया है। फैसले के मुताबिक, सभी नगर परिषद और नगर पंचायत के चुनाव के नतीजे 21 दिसंबर को आएंगे। 20 दिसंबर तक महाराष्ट्र में चुनाव आचार संहिता लागू रहेगी।

सामने आया सीएम फडणवीस का बयान

सीएम फडणवीस ने कहा, "चुनाव प्रक्रिया में चुनाव आयोग को सुधार लाना चाहिए। चुनाव के दौरान सभी ने नियमों का पालन किया है। कोई कोर्ट में चला गया है, इसलिए इस तरह की बातें हो रही हैं। चुनाव को लेकर पुलिस और सुरक्षा व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं।"

देवेंद्र फडणवीस ने कहा, "कोर्ट का जजमेंट मैंने पढ़ा नहीं है पर उन्होंने फैसला दिया है तो सबको मानना ही पड़ेगा। जो चुनाव घोषित किए, जो मतगणना तय की, वह सब आगे धकेला जा रहा है। मैंने मेरे पच्चीस वर्षों के राजनीतिक जीवन में ऐसा नहीं देखा। यह सब कुछ सही नहीं है। अर्थात कोर्ट ने फैसला दिया है। अदालत हो या चुनाव आयोग, दोनों एटोमनोमस संस्था हैं, पर जिन लोगों ने जो उम्मीदवार हैं, इतने दिनों से मेहनत की, प्रचार किया, उनका कोई दोष ना होते हुए भी सिस्टम के विफलता के कारण उन्हें खामियाजा भुगतना पड़ रहा है, जो सही नहीं है। आगे और भी चुनाव होने हैं, चुनाव आयोग गलतियों में सुधार लाए, ऐसा मेरा कहना है।"

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने जताई नाराजगी

कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार ने कहा, "बॉम्बे कोर्ट के नागपुर बेंच के आदेश ने पूरी चुनाव प्रक्रिया का बंटाधार कर दिया है। यह सरासर मजाक है। इसके लिए राज्य सरकार और चुनाव आयोग जिम्मेदार हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश का गलत अर्थ निकालकर प्रस्तुत किया गया। ओबीसी को 27% आरक्षण दिया—यह दिखाने की कोशिश की गई। यह सरकार आखिर किस दिशा में काम कर रही है? वोटों की गिनती अब 3 तारीख से आगे बढ़ाकर 21 दिसंबर कर दी गई है। चुनाव आयोग पूरी तरह सरकार के इशारों पर चलने वाला कठपुतली बन गया है। इतनी सारी चुनाव प्रक्रियाएं पहले भी हुईं, लेकिन ऐसा कभी नहीं हुआ। फडणवीस सरकार पूरी तरह से इसके लिए जिम्मेदार है। मतगणना रोके जाने का मतलब है कि चुनाव प्रक्रिया को जानबूझकर लटकाना। क्या पैसों का खेल चल रहा है? क्या वोट चोरी की कोशिश हो रही है? क्या यह इसलिए किया जा रहा है कि परिणाम सत्ता के पक्ष में आने वाले नहीं हैं? चुनाव परिणाम को प्रभावित करने का यह प्रयत्न है क्या? लोकतंत्र का गला घोंटा जा रहा है।