भारत के ऑटो बाजार में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। जहां पहले ग्राहक सस्ती कारों और भारी डिस्काउंट की तलाश में रहते थे, वहीं अब ट्रेंड पूरी तरह बदल चुका है। FY26 में लोगों ने ज्यादा फीचर्स और प्रीमियम कारों की तरफ रुख किया, जिससे कंपनियों को भी जबरदस्त फायदा हुआ।
पिछले वित्त वर्ष में भारत में 4.7 मिलियन (47 लाख) से ज्यादा पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री हुई, जो एक नया रिकॉर्ड है। लेकिन असली कहानी सिर्फ बिक्री नहीं, बल्कि ग्राहकों की बदलती पसंद है। अब लोग कीमत से ज्यादा क्वालिटी और फीचर्स पर ध्यान दे रहे हैं।
महंगी कारों की बढ़ी डिमांड
विशेषज्ञों के मुताबिक, FY26 में कारों की औसत कीमत करीब 4.3% बढ़ी, जबकि कंपनियों ने डिस्काउंट कम कर दिए। लग्जरी कारों में तो कीमतें 8.9% तक बढ़ीं और छूट में 18% की कटौती हुई। इसका मतलब साफ है कि ग्राहक अब बिना ज्यादा मोलभाव के महंगी कारें खरीद रहे हैं।
SUV बनी पहली पसंद
इस बदलाव में SUV सेगमेंट का बड़ा योगदान रहा। FY26 में कुल कार बिक्री में SUV की हिस्सेदारी बढ़कर करीब 56% हो गई। ज्यादा फीचर्स और बेहतर लुक के कारण लोग SUV को प्रायोरिटी दे रहे हैं, जबकि सेडान और MPV की हिस्सेदारी घट रही है।
खरीदारी का तरीका भी बदला
अब ग्राहक पहले से तय करके शोरूम पहुंच रहे हैं कि उन्हें कौन सा मॉडल और वेरिएंट चाहिए। डीलर्स के अनुसार, लोग पहले की तरह डिस्काउंट के लिए मोलभाव नहीं कर रहे, बल्कि बेहतर फीचर्स के लिए ज्यादा पैसा खर्च करने को तैयार हैं।
आसान लोन ने बढ़ाया बजट
बैंकों और NBFC की ओर से आसान EMI और लंबी अवधि के लोन ने भी इस ट्रेंड को बढ़ावा दिया है। अब ग्राहक अपने बजट को थोड़ा बढ़ाकर बेहतर और महंगे वेरिएंट खरीद रहे हैं। GST में कटौती और आयकर में राहत से मध्यम वर्ग के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा आया है। इससे भी कार बाजार को मजबूती मिली है।
आगे क्या रहेगा ट्रेंड?
अब बड़ा सवाल यह है कि क्या कंपनियां FY27 में भी बिना ज्यादा डिस्काउंट के इसी तरह मुनाफा कमा पाएंगी या फिर उन्हें दोबारा ऑफर्स और छूट का सहारा लेना पड़ेगा।
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