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दिल्ली मेट्रो के बिना जीवन असंभव, डीएमआरसी ने भारत के बारे में मेरी राय बदली: पनगढ़िया

नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने देश के बारे में उनकी निराशावादी सोच को बदल दिया है।

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नई दिल्ली। नीति आयोग के उपाध्यक्ष अरविंद पनगढ़िया ने मंगलवार को कहा कि दिल्ली मेट्रो रेल निगम (डीएमआरसी) ने देश के बारे में उनकी निराशावादी सोच को बदल दिया है। आज दिल्ली मेट्रो रेल के बिना जीवन असंभव है। दिल्ली मेट्रो रेल निगम के 22वें स्थापना दिवस (डीएमआरसी) के अवसर पर मुख्य अतिथि के तौर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि 1980 के दशक से भारत के बारे में उनकी बहुत ही निराशावादी सोच थी, जो आज बदल गई है।

“मैंने सोचा कि भारत विकास में अभी भी काफी पीछे है, लेकिन डीएमआरसी ने देश के बारे में मेरी निराशावाद सोच को तोड़ दिया है। इसने मुझे एक आशा दी है। दिल्ली मेट्रो के बिना जीवन अकल्पनीय है। डीएमआरसी के प्रयासों की सराहना करते हुए पनगढ़िया ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि 15 साल की अवधि में दिल्ली मेट्रो ने 200 किलोमीटर का नेटवर्क बनाया है। डीएमआरसी ने मंगलवार को अपना 22वां स्थापना दिवस मनाया तथा मंडी हाउस को ‘बेस्ट मेट्रो स्टेशन’ घोषित किया।

दिल्ली मेट्रो की यात्रा 1990 के दशक के बाद के वर्षों में शुरू हुई। उसके बाद से इसका नेटवर्क लगातार बढ़ रहा है और आज यह राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र के कई कस्बों को दिल्ली से जोड़ चुकी है। डीएमआरसी अपने काम के अलावा कई अन्य शहरों में मेट्रो रेल नेटवर्क के निर्माण और परिचालन के मामले में अपनी परामर्श सेवाएं दे रहा है। पनगढ़िया ने कहा कि उन्होंने भारत की, खास कर आजादी के बाद के दौर में इसकी विकास प्रक्रिया का बहुत करीबी से विश्लेषण किया है। 1980 के दशक के बाद मैं बहुत निराश हो चला था (और सोचता था) क्या भारत ऐसा कुछ कर सकता है जैसा दक्षिण कोरिया, ताइवान और चीन जैसे कुछ विकासशील देशों ने कर दिखाया है।

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