नई दिल्ली। सरकार ने बुधवार को कहा कि देश में 5जी सर्विस को लॉन्च करने के लिए नीलामी के लिए प्रस्तावित स्पेक्ट्रम पर्याप्त है। हालांकि, उद्योग संगठन ब्रॉडबैंउ इंडिया फोरम (बीआईएफ) का कहना है कि नीलामी के लिए रखा गया स्पेक्ट्रम 5जी मोबाइल सेवाओं को शुरू करने के लिए अपर्यापत है।
दूरसंचार मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर में कहा कि 5जी नीलामी के लिए 3300-3400 मेगाहर्ट्ज और 3425-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड के बीच 275 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम को उपलब्ध कराया गया है। प्रसाद ने कहा कि बीआईएफ ने सरकार को लिखे अपने पत्र में कहा है कि भारत जैसे विशाल और अधिक जनसंख्या वाले देश में आगामी 5जी स्पेक्ट्रम नीलामी के लिए 5जी स्पेक्ट्रम की मात्रा पर्याप्त नहीं है। वहीं दूरसंचार विभाग का मानना है कि वर्तमान में उपलब्ध स्पेक्ट्रम 5जी सेवाएं शुरू करने के लिए पर्याप्त है।
आईटीयू के मुताबिक, 5जी में टाटा को 10 गीगाबिट प्रति सेकेंड की रफ्तार से ट्रांसफर करने की आवश्यकता होती है, जबकि कुछ मामलों में यह रफ्तार 20 गीगाबिट प्रति सेकेंड भी है। उद्योग विशेषज्ञों का कहना है कि निचली डाटा स्पीड के मामले में लगभग 320 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता है, जबकि उच्च डाटा स्पीड के मामले में 670 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम की आवश्यकता होगी।
दूरसंचार विभाग ने देश में 2020 में 5जी सेवाएं शुरू करने का लक्ष्य तय किया है। स्वीडिश टेलीकॉम उपकरण निर्माता एरिक्सन ने अपने वैश्विक अध्ययन रिपोर्ट में कहा है कि भारत में 5जी कनेक्शन 2022 से उपलब्ध होने की संभावना है।
उद्योग संगठनों और टेलीकॉम ऑपरेटर्स ने यह मुद्दा भी उठाया है कि नीलामी के अगले चरण के लिए ट्राई द्वारा स्पेक्ट्रम के लिए सुझाया गया मूल्य बहुत अधिक है। हालांकि, ट्राई ने अपनी सिफारिश में कीमतों में कोई बदलाव न करने की बात कही है।
प्रसाद ने बताया कि ट्राई के आकलन के आधार पर 700 मेगाहर्ट्ज, 800 मेगाहर्ट्ज, 900 मेगाहर्ट्ज, 1800 मेगाहर्ट्ज, 2100 मेगाहर्ट्ज, 2300 मेगाहर्ट्ज, 2500 मेगाहर्ट्ज, 3300-3400 मेगाहर्ट्ज, 3400-3600 मेगाहर्ट्ज बैंड अभी तक अनबिके स्पेक्ट्रम का मूल्य 1 अगस्त 2018 के मुताबिक 4.9 लाख करोड़ रुपए है।
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