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हड़ताल पर जाएंगे देशभर के 30 करोड़ मजदूर, 600 जिलों में ठप्प पड़ सकता है कामकाज, चेक करें तारीख

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव, अमरजीत कौर ने कहा कि हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में दिखेगा, ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे और दूसरे राज्यों में भी आंदोलन का बहुत ज्यादा असर होगा।

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Image Source : PTI असम और ओडिशा में सबसे ज्यादा असर दिखने की संभावना

अलग-अलग मांगों को लेकर देशभर के 30 करोड़ से ज्यादा मजदूर हड़ताल करने जा रहे हैं। 10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के एक संयुक्त संगठन ने सोमवार को कहा कि 12 फरवरी को राष्ट्रव्यापी आम हड़ताल का आह्वान जारी है और उम्मीद है कि देश भर से कम से कम 30 करोड़ मजदूर इस विरोध प्रदर्शन में शामिल होंगे। यूनियनों के समूह ने केंद्र सरकार की ''मजदूर विरोधी, किसान विरोधी और राष्ट्र विरोधी कॉरपोरेट समर्थक नीतियों'' के खिलाफ अपना विरोध दिखाने के लिए 9 जनवरी, 2025 को राष्ट्रव्यापी हड़ताल का आह्वान किया था। 

12 फरवरी को हड़ताल पर रहेंगे 30 करोड़ मजदूर

ऑल इंडिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस की महासचिव, अमरजीत कौर ने मीडिया को बताया कि इस बार 12 फरवरी (बृहस्पतिवार) को बुलाए गए राष्ट्रव्यापी हड़ताल में 30 करोड़ से कम मजदूर हिस्सा नहीं लेंगे। पिछली बार हुए विरोध-प्रदर्शन में लगभग 25 करोड़ मजदूरों ने हिस्सा लिया था। उन्होंने बताया कि हड़ताल का असर देश के 600 जिलों में दिखेगा, जो पिछले साल के लगभग 550 जिलों से ज्यादा है। कौर ने ये भी कहा कि ट्रेड यूनियनों के भागीदारी के दावे जिला और ब्लॉक स्तर पर की गई मजबूत तैयारियों पर आधारित हैं और किसान, साथ ही दूसरे फेडरेशन भी उनके साथ हैं। 

असम और ओडिशा में सबसे ज्यादा असर दिखने की संभावना

बीजेपी शासित राज्यों में प्रस्तावित हड़ताल के असर के बारे में उन्होंने कहा कि ओडिशा और असम पूरी तरह बंद रहेंगे और दूसरे राज्यों में भी आंदोलन का बहुत ज्यादा असर होगा। संयुक्त फोरम के एक बयान के अनुसार, संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी और ट्रेड यूनियनों की मांगों के समर्थन में विरोध प्रदर्शन और लामबंदी में शामिल होने के लिए पूरा समर्थन दिया है। इसी तरह, कृषि मजदूर यूनियनों का संयुक्त मोर्चा भी इस अभियान का हिस्सा है, जो हड़ताल में शामिल हो रहा है, जिसमें 'मनरेगा' को बहाल करने पर खास ध्यान दिया जा रहा है। 

सभी क्षेत्र हो सकते हैं प्रभावित

लगभग सभी राज्यों में, सभी क्षेत्रों- सरकारी, सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के संस्थानों, औद्योगिक क्षेत्रों में, ग्रामीण और शहरी भारत में मजदूरों, किसानों और आम जनता के बीच बड़े पैमाने पर अभियान चलाए गए हैं। कई जगहों पर छात्र और युवा समूह ऐसे अभियानों में शामिल हुए हैं। आम नागरिक हड़ताल की मांगों के लिए अपना समर्थन दे रहे हैं।

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