सरकार ने मंगलवार को तम्बाकू की खेती करने वाले किसानों को बड़ी राहत प्रदान की है। तम्बाकू किसानों का रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट (पंजीकरण प्रमाणपत्र) या लाइसेंस अब एक साल के बजाय तीन साल के लिए वैध (वैलिड) होगा। पीटीआई की खबर के मुताबिक, इस फैसले से देशभर के लगभग 83,500 किसानों को बड़ी राहत मिलेगी और सुविधा होगी। आंध्र प्रदेश, कर्नाटक, तेलंगाना और ओडिशा में करीब 91,000 खलिहानों को कवर करने वाले अपने रजिस्ट्रेशन/लाइसेंस को रिन्यू करने में मदद मिलेगी।
भारत दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा निर्यातक
खबर के मुताबिक, वाणिज्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि इस उपाय से किसानों को हर साल अपने पंजीकरण/लाइसेंस को नवीनीकृत करने के लिए समय की बचत होगी, ताकि वे तीन साल आगे की खेती के लिए अपने लॉजिस्टिक्स और वित्त की योजना बना सकें। भारत 2023 के दौरान मूल्य के लिहाज से दुनिया में अनिर्मित तम्बाकू का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक और चौथा सबसे बड़ा निर्यातक है। वित्त वर्ष 2024-25 में, निर्यात ने भारतीय खजाने में लगभग 2 बिलियन अमरीकी डॉलर (16,728 करोड़ रुपये) का योगदान दिया।
तम्बाकू की खेती करने के लिए लेना होता है लाइसेंस
भारत में वर्जीनिया तम्बाकू को तम्बाकू बोर्ड अधिनियम, 1975 के तहत विनियमित किया जाता है। इसके मुताबिक, वर्जीनिया तम्बाकू की खेती करने के इच्छुक हर उत्पादक को उत्पादक के रूप में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और खलिहान के संचालन के लिए लाइसेंस हासिल करना होता है। इसी के मुताबिक, तम्बाकू बोर्ड सालाना आधार पर रजिस्ट्रेशन /लाइसेंसिंग की सुविधा प्रदान कर रहा है।
अब, सरकार ने व्यापार करने में आसानी के एक हिस्से के तौर पर वर्जीनिया तम्बाकू उत्पादक के रूप में रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट और खलिहान के संचालन के लिए लाइसेंस की वैलिडिटी को बढ़ाने पर विचार किया है, ताकि वर्जीनिया तम्बाकू उत्पादक के रूप में पंजीकरण प्रमाणपत्र और खलिहान के संचालन के लिए लाइसेंस के अनिवार्य वार्षिक नवीनीकरण के बोझ को कम किया जा सके।
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