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Hindi News पैसा बिज़नेस बजट के एक्सपर्ट भी उससे जुड़े शब्दों के अर्थ बताने में हो जाते हैं कन्फ्यूज, यहां जानें सबकुछ

बजट के एक्सपर्ट भी उससे जुड़े शब्दों के अर्थ बताने में हो जाते हैं कन्फ्यूज, यहां जानें सबकुछ

इस बार का बजट हर बार से कितना अलग होगा, यह 1 फरवरी को संसद में ही पता चलेगा, लेकिन बजट में इस्तेमाल होने वाले उन शब्दों का मतलब आप आज जान सकते हैं, जिसको लेकर अक्सर एक्सपर्ट कंफ्यूज हो जाते हैं।

Budget 2023- India TV Paisa Image Source : FILE इस साल का बजट कई मायनों में अलग होने वाला है।

बजट एक ऐसा लेखा-जोखा जो देश के विकास की दिशा तय करता है। इस साल का बजट कई मायनों में अलग होने वाला है, ऐसा बजट से जुड़े एक्सपर्ट कह रहे हैं। सरकार इस बार कुछ खास सेक्टर पर फोकस करने वाली है, लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि यही एक्सपर्ट कई बार बजट से जुड़े कुछ शब्दों के अर्थ बताने में कंफ्यूज हो जाते हैं। आपके साथ ऐसी कोई समस्या ना हो, इसलिए हम आपको उन सभी शब्दों का मतलब आज बताएंगे।

बैलेंस ऑफ पेमेंट (Balance of payments):
एक देश और शेष दुनिया के बीच हुए वित्तीय लेनदेन के हिसाब को बैलेंस ऑफ पेमेंट यानी भुगतान संतुलन कहा जाता है।

बैलेंस बजट (Balanced budget) :
एक केंद्रीय बजट बैलेंस बजट तब कहलाता है, जब वर्तमान प्राप्तियां मौजूदा खर्चों के बराबर होती हैं।

बजट घाटा (Budgetary deficit):
ऐसी स्थिति तब उत्पन्न होती है, जब आपके खर्चे प्राप्त राजस्व से अधिक हो जाते हैं।

बॉड (Bond):
यह कर्ज का एक प्रमाणपत्र होता है, जिसे कोई सरकार या कॉरपोरेशन जारी करती है ताकि पैसा जुटाया जा सके। इस पर ब्‍याज मिलता है।

सेनवैट (CENVAT):
यह एक केंद्रीय वैल्‍यू एडेड टैक्‍स है, जो मैन्युफैक्चरर (निर्माताओं) पर लगाया जाता है। इस टर्म को साल 2000-2001 में पेश किया गया था।

कॉरपोरेट टैक्स (Corporate tax):
इस तरह का टैक्स कॉरपोरेट संस्थानों या फर्मों पर लगाया जाता है, जिसके जरिए सरकार को आमदनी होती है। जीएसटी आने के बाद से यह व्‍यवस्‍था खत्‍म हो गई है। 

चालू खाता घाटा (Current account deficit):
इस तरह का घाटा राष्ट्रीय आयात और निर्यात के बीच के अंतर को दर्शाता है। पढ़ें- बजट किसे कहते है बजट की परिभाषा

राजकोषीय घाटा (Fiscal deficit):
यह सरकार के कुल खर्च और राजस्व प्राप्तियों एवं गैर ऋण पूंजी प्राप्तियों का योग के बीच का अंतर है। 

जीडीपी (GDP):
यह एक वित्तीय वर्ष में देश की सीमा के भीतर उत्पादित कुल वस्तुओं एवं सेवाओं का कुल योग होता है।

फाइनेंस बिल (Finance bill):
यह सरकार द्वारा प्रस्तावित नए टैक्‍स का विवरण होता है, इसमें मौजूदा टैक्‍स में कुछ संशोधन भी शामिल होते हैं।

आयकर (Income tax):
यह आपकी आय के स्रोत जैसे कि आमदनी, निवेश और उस पर मिलने वाले ब्याज पर लगता है।

इनडायरेक्ट टैक्स (Indirect taxes):
यह उत्पादित वस्तुओं एवं आयातित-निर्यातित सामानों पर उत्पाद शुल्क, सीमा शुल्क और सेवा शुल्‍क के जरिये लगता है।

डॉयरेक्ट टैक्स (Direct taxes):
व्यक्ति और संस्थानों की आय और उसके स्रोत पर इनकम टैक्स, कॉरपोरेट टैक्स, कैपिटल गेन टैक्स और इनहेरिटेंस टैक्स के जरिये लगता है।

उत्पाद शुल्क (Excise duties):
एक देश की सीमा के भीतर बनने वाले सभी उत्पादों पर लगने वाला टैक्‍स। एक्‍साइज़ ड्यूटी को भी जीएसटी में समाहित कर लिया गया है। 

सीमा शुल्क (Customs duties):
यह उन वस्तुओं पर लगाया जाता है, जो देश में आयातित की जाती है या फिर देश के बाहर निर्यात (विशेष उत्‍पाद) की जाती है।

विनिवेश (Disinvestment):
सरकार द्वारा किसी सार्वजनिक संस्थान में अपनी हिस्सेदारी बेचकर राजस्‍व जुटाने की प्रक्रिया।

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