उत्तर प्रदेश के साथ-साथ भारत को भी आज एक नया एयरपोर्ट मिलने जा रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज जेवर के नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करेंगे। नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट शुरू होने से दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट का बोझ काफी हद तक कम होगा। इसके अलावा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई शहरों और जिलों में रहने वाले लोगों को अब फ्लाइट लेने के लिए दिल्ली जाने की जरूरत नहीं पड़ेगी। आइए जानते हैं कि नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट और दिल्ली एयरपोर्ट कैसे एक-दूसरे से अलग होंगे। इसके अलावा, किन शहरों के लिए कौन-सा एयरपोर्ट नजदीक पड़ेगा?
इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट
दिल्ली का इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, दुनिया के सबसे बिजी एयरपोर्ट्स में से एक है, जिसकी सालाना क्षमता 10 करोड़ से भी ज्यादा यात्रियों की है। इसमें 3 टर्मिनल (T1, T2, T3) और 4 रनवे ऑपरेशनल हैं। ये दिल्ली, गुरुग्राम और फरीदाबाद के यात्रियों के लिए सबसे करीब है। दिल्ली का T3 अपने एडवांस्ड फीचर्स और बड़े साइज के लिए जाना जाता है। यहां सभी सुविधाएं स्थापित हो चुकी हैं। दिल्ली से देश और दुनिया के लगभग हर कोने के लिए डायरेक्ट फ्लाइट्स और बड़े 'फुल-सर्विस' एयरलाइंस जैसे- एमिरेट्स, एयर इंडिया, लुफ्थांसा का हब है।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट
पीएम मोदी आज नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के पहले चरण का उद्घाटन करने जा रहे हैं। इसकी सालाना क्षमता 1.2 करोड़ यात्रियों की होगी। हालांकि, पूरी तरह से डेवपल होने के बाद इसकी क्षमता 7 करोड़ यात्रियों की हो जाएगी। फिलहाल, ये एयरपोर्ट 1 रनवे के साथ ही ऑपरेट होगा। जेवर में स्थित ये एयरपोर्ट दिल्ली से लगभग 72 किमी और नोएडा से 60 किमी दूर है। ये पश्चिमी उत्तर प्रदेश के आगरा, मथुरा, अलीगढ़ के अलावा ग्रेटर नोएडा के लोगों के लिए काफी फायदेमंद होगा। यमुना एक्सप्रेसवे के अलावा प्रस्तावित रैपिड रेल (RRTS) और फरीदाबाद-जेवर एक्सप्रेसवे इसे जोड़ने वाली मुख्य सड़कें होंगी।
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट से शुरुआत में इंडिगो, अकासा एयर और एयर इंडिया एक्सप्रेस जैसी लो-कॉस्ट एयरलाइंस का फोकस रहेगा। रिपोर्ट्स के अनुसार, यहां एयरलाइंस के लिए 'पार्किंग और लैंडिंग चार्ज' कम हो सकते हैं, जिससे टिकट की कीमतें दिल्ली की तुलना में 10% तक सस्ती होने की उम्मीद है।
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