अमेरिका में इस साल के आखिर तक डॉलर नोटों में एक बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल सकता है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के हस्ताक्षर अब अमेरिकी करेंसी पर दिखाई देंगे। अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने इसकी आधिकारिक घोषणा की। यह कदम अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के अवसर पर उठाया जा रहा है, जिसे एक प्रतीकात्मक और अहम फैसला माना जा रहा है। न्यूयॉर्क टाइम्स की खबर के मुताबिक, इस फैसले के लागू होने के बाद डोनाल्ड ट्रंप ऐसे पहले मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति बन जाएंगे, जिनके हस्ताक्षर डॉलर नोट पर होंगे। उनके सिग्नेचर ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट के नाम के साथ छपेंगे। खास बात यह है कि इस बदलाव के साथ अमेरिकी ट्रेजरर का नाम, जो पिछले एक सदी से करेंसी पर छपता आ रहा था, अब हटा दिया जाएगा।
ट्रेजरी का पक्ष
स्कॉट बेसेंट ने अपने बयान में कहा कि देश की ऐतिहासिक उपलब्धियों और राष्ट्रपति ट्रंप के योगदान को सम्मान देने के लिए यह एक उपयुक्त कदम है। उन्होंने इसे अमेरिका की 250वीं वर्षगांठ के मौके पर “गौरवपूर्ण पहल” बताया। व्हाइट हाउस में वापसी के बाद डोनाल्ड ट्रंप लगातार राष्ट्रीय संस्थानों पर अपनी पहचान मजबूत करने की दिशा में कदम उठा रहे हैं। उन्होंने अपने चित्र वाली 1 डॉलर की कॉइन जारी करने का प्रस्ताव रखा। 24 कैरेट गोल्ड स्मारक सिक्का बनाने की पहल की।
वॉशिंगटन स्थित जॉन एफ. केनेडी परफॉर्मिंग आर्ट्स सेंटर से अपना नाम जोड़ा। डलेस अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा का नाम बदलने का प्रस्ताव भी रखा। इतना ही नहीं, अपने पहले कार्यकाल के दौरान उन्होंने कोविड-19 राहत चेक्स पर भी अपने हस्ताक्षर शामिल करवाए थे।
करेंसी सिग्नेचर का इतिहास
अमेरिकी करेंसी पर हस्ताक्षर की परंपरा 1861 से शुरू हुई, जब अब्राहम लिंकन ने इससे जुड़ा कानून पास किया था। 1914 से ट्रेजरी सेक्रेटरी और ट्रेजरर दोनों के हस्ताक्षर नोटों पर छपते रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि ट्रंप के हस्ताक्षर सभी डॉलर नोटों पर होंगे या सिर्फ कुछ सीमित सीरीज में। ट्रेजरी विभाग ने इस पर अभी कोई विस्तृत जानकारी साझा नहीं की है।
समर्थन और आलोचना दोनों
इस फैसले को लेकर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। ट्रेजरर ब्रैंडन बीच ने इसे सही कदम बताते हुए कहा कि ट्रंप का आर्थिक योगदान ऐतिहासिक रहा है और उनका नाम करेंसी पर होना उचित है। वहीं, रिपब्लिकन अर्थशास्त्री डगलस होल्ट्ज़-ईकिन ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसका राष्ट्रीय हित से सीधा संबंध स्पष्ट नहीं है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि डिजिटल लेनदेन के दौर में इस तरह के बदलाव का प्रभाव सीमित हो सकता है। पूर्व ब्यूरो ऑफ एन्ग्रेविंग एंड प्रिंटिंग के निदेशक लैरी फेलिक्स के अनुसार, ट्रंप के हस्ताक्षर वाले नोट भविष्य में दुर्लभ हो सकते हैं और कलेक्टर्स के बीच इनकी मांग बढ़ सकती है।
विवाद की आशंका
अमेरिकी करेंसी में बदलाव अक्सर विवादों का कारण बनते रहे हैं। ओबामा प्रशासन के दौरान Harriet Tubman को 20 डॉलर नोट पर लाने की योजना बनाई गई थी, लेकिन वह लागू नहीं हो पाई।
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