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GST दरों में सुधार पर बड़ी सहमति, इन दो टैक्स स्लैब वाले ढांचे को मिली मंजूरी, कई चीजों के घटेंगे दाम

GoM की यह सिफारिशें अब जीएसटी काउंसिल को भेजी जाएंगी। परिषद की मंजूरी के बाद ही यह बदलाव लागू होंगे। अगर ऐसा होता है तो यह जीएसटी के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा सुधार कहलाएगा।

वर्तमान में भारत में चार मुख्य GST टैक्स स्लैब लागू हैं।- India TV Hindi
Image Source : PTI वर्तमान में भारत में चार मुख्य GST टैक्स स्लैब लागू हैं।

वस्तु एवं सेवा कर यानी जीएसटी की दरों के पुनर्गठन को लेकर गठित राज्यों के मंत्रियों के समूह यानी GoM ने केंद्र सरकार के दो नए प्रस्तावों को गुरुवार को मंजूरी दे दी। इन प्रस्तावों के तहत मौजूदा चार स्लैब वाली संरचना को बदलकर दो स्लैब- 5% और 18% में लाया जाएगा। साथ ही, 12% और 28% टैक्स स्लैब को खत्म करने का फैसला भी लिया गया है। बिहार के उपमुख्यमंत्री और दर पुनर्गठन समूह के संयोजक सम्राट चौधरी ने बैठक के बाद कहा कि केंद्र सरकार के दोनों प्रस्तावों को दर पुनर्गठन पर गठित मंत्रियों के समूह ने स्वीकार कर लिया है।

विलासिता और 'सिन गुड्स' पर 40% जीएसटी

उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि केंद्र सरकार ने अत्यंत विलासिता वाली वस्तुओं और 'सिन गुड्स' (जैसे शराब, सिगरेट, लक्ज़री कारें आदि) पर 40% जीएसटी लगाने का प्रस्ताव रखा है। इस पर पश्चिम बंगाल की वित्त मंत्री चंद्रिमा भट्टाचार्य ने सुझाव दिया कि 40% टैक्स के ऊपर एक अतिरिक्त उपकर (लेवी) भी लगाया जाए, जिससे इन वस्तुओं पर वर्तमान टैक्स बोझ (28% + सेस) बना रहे। भट्टाचार्य ने यह चिंता भी जताई कि केंद्र के प्रस्ताव में यह नहीं बताया गया कि नई दरें लागू होने के बाद सरकारों को कितना राजस्व नुकसान होगा।

GST की मौजूदा दरें

वर्तमान में भारत में चार मुख्य GST टैक्स स्लैब लागू हैं: 5%, 12%, 18% और 28% है। रोजमर्रा की जरूरत की वस्तुओं पर आमतौर पर 0% या 5% टैक्स लगता है। लग्जरी आइटम्स और 'सिन गुड्स' पर 28% टैक्स + अलग-अलग दरों पर सेस लगाया जाता है।

आगे की प्रक्रिया क्या होगी?

GoM की यह सिफारिशें अब जीएसटी काउंसिल को भेजी जाएंगी। परिषद की मंजूरी के बाद ही यह बदलाव लागू होंगे। अगर मंजूरी मिलती है, तो यह जीएसटी सिस्टम में अब तक का सबसे बड़ा सुधार माना जाएगा। यह कदम टैक्स सिस्टम को अधिक सरल और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है, जिससे कारोबारियों और उपभोक्ताओं, दोनों को लाभ मिल सकता है।

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