इंटरग्लोब एविएशन, जो भारत की सबसे बड़ी एयरलाइन IndiGo की पैरेंट कंपनी है, ने 30 सितंबर को खत्म हुई तिमाही के लिए ₹2,582.10 करोड़ का भारी शुद्ध घाटा दर्ज किया है। यह घाटा मुख्य रूप से विदेशी मुद्रा के उतार-चढ़ाव के कारण हुआ है। पीटीआई की खबर के मुताबिक, पिछले साल की समान तिमाही यानी Q2 FY23 में एयरलाइन को ₹986.7 करोड़ का घाटा हुआ था।
मुद्रा के प्रभाव को छोड़कर प्रदर्शन
इंडिगो ने बताया कि अगर मुद्रा में उतार-चढ़ाव (विशेषकर डॉलर-आधारित भविष्य के दायित्वों) के प्रभाव को हटा दिया जाए, तो कंपनी का प्रदर्शन काफी मजबूत रहा-
शुद्ध लाभ (मुद्रा प्रभाव छोड़कर): ₹1,039 करोड़ (पिछले साल इसी अवधि में ₹7,539 करोड़ का शुद्ध घाटा हुआ था)।
परिचालन लाभ: ₹104 करोड़ (पिछले साल इसी समय परिचालन घाटा था)।
सीईओ का बयान और भविष्य की रणनीति
इंडिगो के सीईओ पीटर एल्बर्स ने परिणामों पर टिप्पणी करते हुए कहा कि मुद्रा उतार-चढ़ाव को छोड़कर, एयरलाइन के टॉपलाइन राजस्व में 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो अनुकूलित क्षमता तैनाती का परिणाम है। साल की शुरुआत में चुनौतियों के बावजूद, जुलाई में स्थिति स्थिर हुई और अगस्त-सितंबर में मजबूत रिकवरी देखी गई। इंडिगो ने वित्तीय वर्ष 2026 के लिए अपनी क्षमता मार्गदर्शन में वृद्धि की है ताकि बढ़ती मांग को पूरा किया जा सके।
दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल आय
चालू वित्तीय वर्ष की दूसरी तिमाही में कंपनी की कुल आय ₹19,599.5 करोड़ रही, जो पिछले वर्ष की ₹17,759 करोड़ की आय से अधिक है। सितंबर 2025 में घरेलू बाजार में इंडिगो की 64.3 प्रतिशत हिस्सेदारी बरकरार रही। घोषणा के बाद, बीएसई पर एयरलाइन के शेयर 1 प्रतिशत से अधिक गिरकर ₹5,635 प्रति शेयर पर बंद हुए।
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