पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से होने वाली शिपिंग में भारी गिरावट आई है। ईरान पर अमेरिका और इजराइल के हमलों के बाद तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद, समुद्री सुरक्षा अधिकारियों के आकलन के अनुसार, 28 फरवरी से अभी तक यहां जहाजों की आवाजाही में 90 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट आई है। रॉयल नेवी के नेतृत्व वाली निगरानी संस्था, UK Maritime Trade Operations (UKMTO) ने 1 मार्च से 27 अप्रैल के बीच 40 से ज्यादा घटनाओं की रिपोर्ट दी है। इन घटनाओं में क्षेत्र से गुजरने वाले व्यापारिक जहाजों पर हमले, जहाजों को नुकसान, उत्पीड़न और बाल-बाल बचने जैसी स्थितियां शामिल हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों को पहुंचाया गया नुकसान
निगरानी टीम ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, "जहाजों या उनके क्रू को या तो सीधे तौर पर नुकसान पहुंचाया गया या उन्हें अप्रत्यक्ष नुकसान झेलना पड़ा। इसके अलावा, कई जहाजों को परेशान किया गया या उन्हें वापस लौटने के लिए मजबूर किया गया।" टीम ने आगे बताया कि इनमें से कम से कम 26 घटनाओं में व्यापारिक जहाजों पर सीधे हमले किए गए थे। बताते चलें कि अमेरिका और इजरायल ने 28 फरवरी को ईरान पर हमलों की शुरुआत की थी। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत हो गई थी। अली खामेनेई की मौत का बदला लेने के लिए ईरान ने इजरायल में हमले शुरू किए और खाड़ी देशों में स्थित अमेरिकी ठिकानों को भी निशाना बनाया।
130 की तुलना में अब 10 से भी कम जहाजों को ही मिल रहा रास्ता
इतना ही नहीं, ईरान ने अपने नियंत्रण वाले स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को भी बंद कर दिया। स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से दुनियाभर का लगभग 30 प्रतिशत कच्चा तेल और गैस सप्लाई होता है। यहां से रोजाना लगभग 130 विशाल जहाज गुजरते थे। लेकिन, अब ये संख्या घटकर 10 से भी कम हो गई है। दुनिया के सबसे अहम समुद्री रास्तों में शामिल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से तेल और गैस की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। UK मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस के अधिकारियों ने बताया कि इस स्थिति के कारण खाड़ी के अंदर 850 से 870 बड़े मालवाहक जहाज भी फंस गए हैं, जो संकरे जलमार्ग में सुरक्षा जोखिमों के चलते सुरक्षित रूप से बाहर नहीं निकल पा रहे हैं।
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