भारत में मेडिकल इमरजेंसी और इलाज से जुड़े खर्चों के कारण 11% पर्सनल लोन उधारकर्ता कर्ज लेने को मजबूर हो रहे हैं। एक हालिया रिपोर्ट 'द पर्सनल लोन स्टोरी' के मुताबिक, टियर-1 शहरों में यह आंकड़ा 14% तक पहुंच जाता है, जबकि टियर-2 शहरों में 10% और टियर-3 शहरों में 8% उधारकर्ताओं ने स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों के लिए पर्सनल लोन लिया। यह आंकड़े देश में हेल्थ इंश्योरेंस की कम पहुंच और तेजी से बढ़ती चिकित्सा लागत की ओर स्पष्ट इशारा करते हैं।
पर्सनल लोन लेने की मुख्य वजह
पैसाबाजार की इस रिपोर्ट के मुताबिक, यह अध्ययन 23 शहरों और कस्बों में 2,889 पर्सनल लोन उधारकर्ताओं के गहन बातचीत पर आधारित है। इसमें कर्ज लेने के कारणों, निर्णय प्रक्रिया, प्राथमिकताओं और क्रेडिट जागरुकता जैसे महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तृत जानकारी सामने आई है। उधारकर्ताओं ने रोजमर्रा के जरूरी खर्चे, घर की अचानक मरम्मत, शादी-विवाह जैसे समारोह और अन्य तात्कालिक जरूरतों को भी पर्सनल लोन लेने की मुख्य वजह बताई है।
रिपोर्ट के कुछ मुख्य निष्कर्ष
48% उधारकर्ताओं ने आवश्यक खर्चों के लिए लोन लिया।
36% ने अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए।
16% ने बिजनेस या निवेश के लिए।
लाइफस्टाइल खर्चों के लिए भी पर्सनल लोन
टियर-3 शहरों में रोजमर्रा की जरूरतों के लिए लोन लेने की संभावना टियर-1 शहरों की तुलना में 2.4 गुना ज्यादा है। स्व-नियोजित लोगों के अलावा 9% नौकरीपेशा लोग भी पारिवारिक व्यवसाय, साइड बिजनेस या पैशन प्रोजेक्ट्स के लिए पर्सनल लोन ले रहे हैं। सालाना 7.5 से 10 लाख रुपये आय वाले मध्यम वर्ग में लाइफस्टाइल खर्चों के लिए लोन लेने की दर सबसे ज्यादा (40%) है। 11% उधारकर्ताओं ने शादी और अन्य समारोहों के लिए कर्ज लिया, जिसमें टियर-1 शहरों में यह 14% रहा।
ऑनलाइन vs ऑफलाइन पर्सनल लोन
अभी भी ऑफलाइन पर भरोसा ज्यादा है। ऑनलाइन लोन प्लेटफॉर्म्स की उपलब्धता बढ़ने के बावजूद सिर्फ 32% लोगों ने ऑनलाइन माध्यम से पर्सनल लोन लिया। ज्यादातर उधारकर्ता अभी भी ऑफलाइन चैनलों पर निर्भर हैं। एक और बात यह भी सामने आई कि 25% उधारकर्ताओं ने किसी अन्य विकल्प की जांच किए बिना ही लोन ले लिया। खासकर Gen Z में यह आंकड़ा 31% तक पहुंच गया।
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