एलपीजी सिलेंडरों की किल्लत से जूझ रही आम जनता और कारोबारियों के बीच इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर की मांग में जबरदस्त तेजी आई है। खासतौर पर कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की किल्लत की वजह से होटल, ढाबों, रेस्टॉरेंट का व्यापार बुरी तरह से प्रभावित हुआ है, जिसकी वजह से देश की टूरिज्म इंडस्ट्री पर भी बुरा असर पड़ रहा है। अपनी खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में भी व्यापारी परेशान हैं और रसोई को एलपीजी कि किल्लत के बीच चालू रखने के लिए इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर की ओर रुख कर रहे हैं।
पैनिक की वजह से कई गुना बढ़ी इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर की बिक्री
शिमला में घरेलू उपभोक्ता भी संकट से बचने के लिए बड़ी संख्या में इंडक्शन चूल्हों और इलेक्ट्रिक बर्नर खरीद रहे हैं। शिमला के एक दुकानदार दिव्येश ने बताया कि कमर्शियल और घरेलू, दोनों तरह के इलेक्ट्रिक बर्नर की मांग बहुत ज्यादा है। उन्होंने कहा, ''पहले हम सप्ताह में 3-4 यूनिट ही बेचते थे, लेकिन अब एक ही दिन में 8-9 यूनिट बिक रहे हैं।'' इसके साथ ही इंडक्शन के अनुकूल बर्तनों की बिक्री भी बढ़ी है। एक अन्य दुकानदार एस. एन. शर्मा ने बताया कि घबराहट में खरीदारी आम हो गई है और एक दिन में होने वाली बिक्री कई गुना बढ़ गई है।
शिमला में होटल की 30-40 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल
गैस की कमी के कारण विकल्प के तौर पर कोयले की मांग में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, हालांकि डीलरों का कहना है कि कोयले की कीमतें फिलहाल स्थिर हैं और भंडार पर्याप्त है। होटल लैंडमार्क के मैनेजर संदीप सोनी ने बताया कि उनके यहां एलपीजी पूरी तरह खत्म हो गई है। उन्होंने कहा, ''अब खाना बिजली के उपकरणों और लकड़ी से बनाया जा रहा है। जिन व्यंजनों के लिए गैस अनिवार्य है, उन्हें मेनू से हटा दिया गया है।'' उन्होंने ये भी बताया कि होटल की 30-40 प्रतिशत बुकिंग कैंसिल हो गई है।
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