पेट्रोलियम कंपनियों ने मंगलवार को उद्योग जगत के दिग्गजों से एथनॉल को भारतीय परिवारों के लिए एक स्वच्छ रसोई ईंधन के रूप में विकसित करने का आह्वान किया। पेट्रोलियम कंपनियों का मानना है कि इससे आयातित एलपीजी पर निर्भरता कम करने और जैव ईंधन के इस्तेमाल को बढ़ावा देने की कोशिशों को बल मिलेगा। फेडरेशन ऑफ इंडियन पेट्रोलियम इंडस्ट्री (FIPI) के निदेशक (डाउनस्ट्रीम) आर. एस. रवि ने ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन (AIDA) के सम्मेलन को संबोधित करते हुए ये अपील की।
एथनॉल से चलने वाले रसोई स्टोव पर चल रहा है काम
आर. एस. रवि ने एथनॉल आधारित रसोई स्टोव पर जारी शोध पर प्रकाश डालते हुए कहा कि एलपीजी उपकरण अनुसंधान केंद्र और अलग-अलग भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IIT) में इस दिशा में काफी काम हो रहा है तथा इसके प्रारूप (प्रोटोटाइप) जल्द ही तैयार होने की संभावना है। रवि ने इस संबंध में ऑल इंडिया डिस्टिलर्स एसोसिएशन और उसके सदस्यों से दो प्रमुख मोर्चों पर सक्रिय सहयोग मांगा। उन्होंने इन स्टोव के उत्पादन को बढ़ाने के लिए विनिर्माताओं के साथ जुड़ने और सबसे महत्वपूर्ण रूप से सीधे घरों तक एथनॉल पहुंचाने के लिए ए क व्यावहारिक आपूर्ति श्रृंखला विकसित करने पर जोर दिया।
रवि ने स्पष्ट किया कि अभी तक उद्योग पेट्रोलियम कंपनियों को थोक में आपूर्ति कर रहा है, लेकिन अब इस मॉडल को बदलने और वितरण के प्रभावी स्वरूप पर विचार करने की जरूरत है। उनकी ये टिप्पणी पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल मिश्रण (E-20) के सफल कार्यान्वयन की पृष्ठभूमि में आई है।
एलपीजी पर निर्भरता घटाने की जरूरत
बताते चलें कि मिडिल-ईस्ट में जारी तनाव के बीच भारत में एलपीजी गैस की किल्लत हो गई है। हालांकि, परिस्थितियां काफी हद तक नियंत्रण में हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध ने देश को एलपीजी पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर भी विचार करने के लिए प्रोत्साहित किया है। एलपीजी सप्लाई के लिए घरेलू उपभोक्ताओं को प्राथमिकता दी जा रही है। जबकि, कमर्शियल एलपीजी की सप्लाई भी बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। हालांकि, गैस पर निर्भर फैक्टरियों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। घरेलू उपभोक्ताओं के बाद कमर्शियल एलपीजी को प्राथमिकता देने की वजह से फैक्टरियों को पर्याप्त गैस नहीं मिल रही है।
Latest Business News