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World Bank ने भारतीय अर्थव्यवस्था पर जताया भरोसा, भारत की क्षमता का माना लोहा

विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा कि हम इस समय भारत के विकास को लेकर चिंतित नहीं हैं। हम भारत को लेकर बहुत आशावादी हैं और आशावादी बने रहेंगे।

विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे (फाइल)- India TV Hindi
Image Source : FILE विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे (फाइल)

वर्ल्ड बैंक यानी विश्व बैंक ने बुधवार को भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूत विश्वास व्यक्त किया है। इतना ही नहीं, दुनिया के देशों से भारत में निवेश करने की भी अपील की है। एडवांटेज असम 2.0 बिजनेस समिट में बोलते हुए, विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने यह बात कही। पीटीआई की खबर के मुताबिक, कौमे ने कहा कि विकास में मामूली गिरावट के बावजूद, ऋणदाता भारत की आर्थिक संभावनाओं के बारे में आशावादी बना हुआ है।

भारत के विकास को लेकर चिंतित नहीं

खबर के मुताबिक, समिट में आगे बोलते हुए उन्होंने कहा कि हम इस समय भारत के विकास को लेकर चिंतित नहीं हैं। हम भारत को लेकर बहुत आशावादी हैं और आशावादी बने रहेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि आर्थिक विकास में एक प्रतिशत का उतार-चढ़ाव विश्व बैंक के पॉजिटिव नजरिये को नहीं बदलता है। अगर कोई हाल के आंकड़ों को लेकर चिंतित है, तो हम कहना चाहेंगे कि चिंता न करें।

यहां आएं और निवेश करें

भारत दुनिया में चमकता हुआ प्रकाश है। अगर आप निवेश करना चाहते हैं, तो यहां आएं और निवेश करें। भारत की वृद्धि इसे निवेश करने के लिए एक जगह बनाती है। चालू वित्त वर्ष के लिए, भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने दिसंबर 2024 में आर्थिक विकास दर 7. 2 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया है, जबकि 2023-24 में यह 8. 2 प्रतिशत रहेगी।

भारत को विश्व बैंक का वित्तपोषण बढ़ने की उम्मीद

एक दिन पहले ही विश्व बैंक के कंट्री डायरेक्टर ऑगस्टे तानो कौमे ने कहा था कि अल्पावधि से मध्यम अवधि में भारत को विश्व बैंक का वित्तपोषण बढ़ने की उम्मीद है, जिसका ध्यान देश के विकास लक्ष्यों को समर्थन देने पर होगा। उन्होंने कहा कि एक देश के रूप में भारत वैश्विक स्तर पर हमारा सबसे बड़ा ग्राहक है। हम चाहेंगे कि भारत हमारा सबसे बड़ा ग्राहक बने।

जैसे-जैसे भारत एक उच्च मध्यम आय वाला देश और विकसित देश बनता जाएगा, भारत को हमसे कम (संप्रभु) वित्तपोषण की आवश्यकता होगी। विकास के साथ, भारत को वित्तपोषण से अधिक विश्व बैंक के ज्ञान इनपुट की आवश्यकता होगी।

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