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FPI ने मार्च में अब तक ₹88,180 करोड़ निकाले, मिडिल-ईस्ट में जारी युद्ध से घरेलू शेयर बाजार बुरी तरह प्रभावित

मार्च में जारी निकासी के साथ, 2026 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं।

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Image Source : PIXABAY साल 2026 में 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची एफपीआई की निकासी

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव का घरेलू शेयर बाजार पर बहुत बुरा असर देखने को मिल रहा है। युद्ध की वजह से कमजोर होते रुपये और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर असर पड़ने की आशंका के बीच विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने मार्च में अबतक भारतीय शेयर बाजार से 88,180 करोड़ रुपये निकाल चुके हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार, एफपीआई की ये निकासी फरवरी में उनके द्वारा की गई खरीदारी के बाद देखने को मिली है। फरवरी में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने भारतीय शेयरों में 22,615 करोड़ रुपये का निवेश किया था, जो 17 महीनों का सबसे ऊंचा आंकड़ा था। बताते चलें कि पिछले हफ्ते घरेलू शेयर बाजार में फ्लैट कारोबार देखने को मिला था।

साल 2026 में 1 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंची एफपीआई की निकासी

मार्च में जारी निकासी के साथ, 2026 में अबतक एफपीआई भारतीय शेयर बाजार से 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निकाल चुके हैं। मार्च में (20 मार्च तक), एफपीआई हर कारोबारी सत्र में शुद्ध बिकवाल रहे। उन्होंने इस दौरान 88,180 करोड़ रुपये के शेयर बेचकर पैसे निकाले हैं। बताते चलें कि एफपीआई ने पिछले साल अक्टूबर में 94,017 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड निकासी की थी। एंजल वन के वकारजावेद खान ने कहा कि एफपीआई की निकासी की मुख्य वजह पश्चिम एशिया तनाव है। इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद होने से कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं, जिससे एफपीआई जोखिम लेने से बच रहे हैं। 

अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल में बढ़ोतरी भी बिकवाली की बड़ी वजह

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट रिसर्च इंडिया के चीफ मैनेजर (रिसर्च) हिमांशु श्रीवास्तव ने कहा कि बढ़ता अमेरिकी बॉन्ड प्रतिफल एफपीआई की निकासी की एक और बड़ी वजह है। ज्यादा प्रतिफल ने डॉलर वाली संपत्तियों का आकर्षण बढ़ाया है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से एफपीआई निकासी कर रहे हैं। इसी तरह की चिंता जताते हुए जियोजीत इन्वेस्टमेंट्स के वी. के. विजयकुमार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्ष ने एफपीआई की बिकवाली को तेज कर दिया है। उन्होंने कहा कि वैश्विक बाजारों में कमजोरी, रुपये में लगातार गिरावट और भारत की वृद्धि और कंपनियों की कमाई पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का असर पड़ने की आशंका ने निवेशक धारणा को प्रभावित किया है।

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