देश के किसान अपनी जरूरतों के लिए सदियों तक स्थानीय सूदखोरों और साहूकारों पर निर्भर रहे हैं। यहां उन्हें भारी भरकम ब्याज चुकाना पड़ता है वहीं जमीनें तक गिरवी रखनी पड़ती हैं। किसान और ग्रामीण इस ब्याज के जंजाल में फंसकर अपना सब कुछ गंवा देेते हैं। इस मुश्किल से किसानों को बाहर निकालने के लिए सरकार पिछले कई वर्षों से किसान क्रेडिट कार्ड (Kisan Credit Card) पर जोर दे रही है। कर्ज लेना आसान बनाने के लिए सरकार ने साल 1998 में किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम शुरू की थी। यह कार्ड किसानों को सस्ती ब्याज दरों पर आसान कर्ज उपलब्ध कराता है।
मोदी सरकार ने मार्च 2021 तक देश में 15 लाख करोड़ रुपये का कृषि लोन बांटने का टारगेट रखा है। कर्ज लेकर खेती करने वाले किसानों की सहूलियत के लिए किसान क्रेडिट कार्ड स्कीम को प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना से लिंक कर दिया गया है। इसकी वजह से अब खेती-किसानी के लिए लोन लेना काफी आसान हो गया है। सरकार ने बैंकिंग एसोसिएशन से केसीसी बनाने के काम में तेजी लाने को कहा है। सरकार की सलाह पर ही बैंकों ने इसकी प्रोसेसिंग फीस खत्म कर दी है। जबकि पहले केसीसी बनवाने के लिए 2 से 5 हजार रुपये तक का खर्च आता था।
बस तीन डॉक्यूमेंट से बन जाएगा किसान क्रेडिट कार्ड
पहले केसीसी के तहत लोन पाने की प्रक्रिया कठिन थी। इसीलिए पीएम किसान स्कीम से केसीसी को जोड़ दिया गया है। पीएम किसान स्कीम की वेबसाइट पर ही केसीसी का फार्म उपलब्ध करवा दिया गया है। इसलिए बैंकों से कहा गया है कि वे सिर्फ तीन डॉक्यूमेंट लें और उसी के आधार पर लोन दें। किसान क्रेडिट कार्ड बनवाने के लिए बस आपको आधार, पैन, फोटो ली जाएगी। इससे यह पुष्टि होगी कि आप किसान हैं। वहीं आपसे एक एफीडेविड लिया जाएगा। इससे पता चलेगा कि आप पर किसी बैंक में आवेदक का कर्ज तो बकाया नहीं है।
कौन ले सकता है केसीसी
अब केसीसी सिर्फ खेती-किसानी तक सीमित नहीं है। पशुपालन और मछलीपालन भी इसके तहत 2 लाख रुपये तक का कर्ज मिल सकेगा। खेती-किसानी, मछलीपालन और पशुपालन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति, भले ही वो किसी और की जमीन पर खेती करता हो, इसका लाभ ले सकता है। न्यूनतम उम्र 18 साल और अधिकतम 75 साल होनी चाहिए।
किसान क्रेडिट कार्ड पर फायदे अनेक
के तहत 3 लाख रुपये तक का कर्ज सिर्फ 7 फीसदी ब्याज पर मिलता है। समय पर पैसा लौटा देते हैं तो 3 फीसदी की छूट मिलती है। इस तरह ईमानदार किसानों को 4 परसेंट ब्याज पर ही पैसा मिल रहा है। जो साहूकारों के चंगुल में फंसने से कहीं अच्छा है।
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