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ICICI Bank ने बदला मिनिमम बैलेंस का नियम, अब ₹50,000 की जगह केवल इतना रखना होगा जरूरी

ICICI Bank ने इस फैसले में बदलाव, ग्राहकों को अधिक लचीलापन और सुविधा देने के उद्देश्य से किया है, जिससे ज्यादा लोग बैंकिंग सिस्टम से जुड़ सकें।

नए ग्राहकों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी।- India TV Hindi
Image Source : PTI नए ग्राहकों को इस फैसले से बड़ी राहत मिलेगी।

प्राइवेट सेक्टर के ICICI Bank ने बुधवार को अपने फैसले से यू-टर्न ले लिया। बैंक ने अपने सेविंग अकाउंट से जुड़े नियमों में अहम बदलाव की घोषणा की है। बैंक ने मेट्रो और शहरी क्षेत्रों में नए बचत खाते खोलने वाले ग्राहकों के लिए न्यूनतम औसत बैलेंस की सीमा को ₹50,000 से घटाकर ₹15,000 कर दिया है। moneycontrol की खबर के मुताबिक, बैंक के इस कदम के बाद अब शहरों और मेट्रो शाखाओं में नए ग्राहकों को खाता बनाए रखने के लिए पहले के मुकाबले तीन गुना कम बैलेंस रखना होगा। यह बदलाव उन ग्राहकों के लिए राहत भरा है जो कम इनकम पर बैंकिंग करते हैं या पहली बार खाता खोल रहे हैं। बैंक के नए नियमों के मुताबिक, जिस बैंक अकाउंट में तय बैलेंस नहीं होगा, उन पर शॉर्टफॉल का 6% या ₹500 (जो भी कम हो) का जुर्माना लगेगा। 

किन ग्राहकों को कितना रखना होगा मिनिमम बैलेंस (रुपये में)

क्षेत्र पूर्व में मिनिमम बैलेंस  प्रस्तावित मिनिमम बैलेंस  नई लागू मिनिमम बैलेंस 
मेट्रो/शहरी 10,000 50,000 15,000
अर्द्ध शहरी 5,000 25,000 7,500
ग्रामीण 2,000 10,000 2,500

हालांकि, रोलबैक के बाद भी अर्ध-शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में 50% तक की बढ़ोतरी की गई है।

किन खातों पर लागू नहीं होंगे ये नियम?

बैंक ने स्पष्ट किया है कि ये नए मिनिमम एवरेज बैलेंस नियम निम्न खातों पर लागू नहीं होंगे:

  • सैलरी अकाउंट
  • वरिष्ठ नागरिकों/पेंशनधारकों (60 वर्ष से ऊपर) के खाते
  • बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट / प्रधानमंत्री जनधन योजना
  • दिव्यांगजनों के लिए खोले गए विशेष खाते
  • 31 जुलाई 2025 से पहले खोले गए बचत खाते

सरकारी बैंकों ने मिनिमम एवरेज बैलेंस पेनाल्टी हटा दी

जहां ICICI जैसे निजी बैंक मिनिमम एवरेज बैलेंस बढ़ा रहे हैं, वहीं सरकारी बैंक मिनिमम बैलेंस की पेनाल्टी को हटा या कम कर रहे हैं। SBI, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक और इंडियन बैंक जैसे कई सरकारी बैंकों ने अपने खाताधारकों को राहत दी है। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोकसभा में बताया कि यह निर्णय वित्तीय समावेशन को बढ़ावा देने और जमा राशि में वृद्धि जैसी संभावनाओं को देखते हुए किया गया है।

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