Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती व्रत रखा जाएगा 1 फरवरी रविवार के दिन, जानें शुभ मुहूर्त और पूजा की विधि
Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती हर वर्ष माघ शुक्ल पूर्णिमा को मनाई जाती है। इस साल 1 फरवरी को ललिता जयंती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं ललिता जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त और पूजा विधि।

Lalita Jayanti 2026: ललिता जयंती का व्रत 1 फरवरी के दिन रखा जाएगा। माता ललिता को त्रिपुरा सुंदरी भी कहा जाता है क्योंकि त्रीपुरार्नव में कहा गया है कि यह देवी तीन नाड़ियों इड़ा, पिंगला और सुषुम्ना में यानि मन, बुद्धि और चित्त में रहती हैं। मां ललिता के तीन रूप हैं- आठ वर्षीय बालिका, इस रूप को त्रिपुर सुंदरी कहा जाता है। सोलह वर्षीय किशोरी जिन्हें मां षोडषी कहा जाता है, वहीं मां के युवा स्वरूप को ललिता कहा जाता है। मां ललिता को मनोकामनाएं पूरी करने वाली और मोक्ष प्रदान करने वाली माना जाता है। आइए ऐसे में जान लेते हैं की ललिता जयंती के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और इस दिन किस विधि से आपको माता की पूजा करनी चाहिए।
ललिता जयंती पर पूजा का शुभ मुहूर्त (Lalita Jayanti Puja Muhurt)
ललिता जयंती माघ माह की पूर्णिमा तिथि को मनाई जाती है। साल 2026 में पूर्णिमा तिथि 1 फरवरी 2026 की सुबह 05 बजकर 52 मिनट से शुरू होगी और पूर्णिमा तिथि का समापन 2 फरवरी सुबह 03 बजकर 38 मिनट पर होगा। उदया तिथि के अनुसार ललिता जयंती का व्रत 1 फरवरी को रखा जाएगा। नीचे पूजा के लिए शुभ मुहूर्त दिए गए हैं।
ब्रह्म मुहूर्त- सुबह 5 बजकर 24 मिनट से 6 बजकर 17 मिनट तक
प्रात: संध्या- सुबह 5 बजकर 57 मिनट से 7 बजकर 13 मिनट तक
अभिजीत मुहूर्त- दोपहर 12 बजकर 30 मिनट से 1 बजकर 15 मिनट तक
सायाह्न सन्ध्या- शाम 06 बजकर 32 मिनट से रात 07 बजकर 48 मिनट तक
ललिता जंयती पूजा विधि
ललिता जयंती के दिन सूर्योदय से पहले उठकर आपको स्नान-ध्यान आदि करना चाहिए। इसके बाद सफेद रंग के स्वच्छ वस्त्र धारण कर आपको पूजा स्थल पर गंगाजल का छिड़काव करना चाहिए। तत्पश्चात एक चौकी पर सफेद कपड़ा बिछाकर उसपर मां ललिता की तस्वीर या प्रतिमा स्थापित करें। अगर आपके पास मां ललिता की तस्वीर उपलब्ध नहीं है तो श्री यंत्र भी आप स्थापित कर सकते हैं। फिर आपको धूप-दीप जलाना चाहिए और इसके बाद माता को अक्षत, फल-फूल, कुमकुम आदि अर्पित करना चाहिए। धूप-दीप जलाने के बाद आपको माता ललिता की कथा का पाठ करना चाहिए और इसके बाद माता की आरती का पाठ करना चाहिए। पूजा के अंत में प्रसाद का वितरण आपको करना चाहिए। अगर व्रत रखने वाले हैं तो शाम की पूजा के बाद आपको खुद भी प्रसाद ग्रहण करना चाहिए और घर के अन्य लोगों को भी बांटना चाहिए।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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