Ahoi Ashtami 2025 Puja Time: अहोई अष्टमी व्रत मुख्य रूप से संतान की लंबी उम्र, अच्छे स्वास्थ्य और उज्जवल भविष्य के लिए रखा जाता है। इस दिन महिलाएं निर्जला उपवास रखकर अहोई माता की विधि विधान पूजा करती हैं। करवा चौथ के समान अहोई अष्टमी के दिन भी कठोर उपवास रखा जाता है। आकाश में तारों का दर्शन करने के बाद ही इस उपवास का पारण किया जाता है। वहीं कुछ महिलाएं चांद का दर्शन करने के बाद ये व्रत खोलती हैं। चलिए आपको बताते हैं अहोई अष्टमी की पूजा का शुभ मुहूर्त क्या रहेगा।
अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2025 (Ahoi Ashtami Puja Muhurat 2025)
| शहर का नाम | अहोई अष्टमी पूजा मुहूर्त 2025 |
| नई दिल्ली | 05:53 पी एम से 07:08 पी एम |
| नोएडा | 05:53 पी एम से 07:08 पी एम |
| लखनऊ | 05:40 पी एम से 06:54 पी एम |
| कानपुर | 05:42 पी एम से 06:57 पी एम |
| चंडीगढ़ | 05:54 पी एम से 07:09 पी एम |
| पटना | 05:24 पी एम से 06:38 पी एम |
| जम्मू | 06:00 पी एम से 07:15 पी एम |
| देहरादून | 05:49 पी एम से 07:04 पी एम |
| शिमला | 05:52 पी एम से 07:07 पी एम |
| जयपुर | 06:00 पी एम से 07:15 पी एम |
| मुंबई | 06:17 पी एम से 07:31 पी एम |
| रांची | 05:25 पी एम से 06:39 पी एम |
| कोटा | 06:01 पी एम से 07:16 पी एम |
| बेंगलूरु | 06:02 पी एम से 07:15 पी एम |
अहोई अष्टमी पूजा विधि (Ahoi Ashtami Puja Vidhi)
- अहोई अष्टमी की पूजा के लिए दीवार पर अहोई माता का चित्र बनाएं या बना बनाया चित्र लगाएं।
- इसके साथ सप्त ऋषियों की आकृति भी बनाएं।
- दीवार पर मिट्टी, गेरू या रंग से अष्टकोण बनाकर उसमें अहोई माता, सेई और सेई के सात बच्चों का चित्र बनाएं।
- पूजास्थल पर जल से भरा कलश, अगरबत्ती, फूल, दूध, रोली, चावल, दीपक, मिठाई और गेहूं के दाने रखें।
- अहोई माता को फूल चढ़ाएं।
- अहोई माता की व्रत कथा पढ़ें या सुनें।
- फिर शाम में तारों को अर्घ्य दें।
- इसके बाद अपना व्रत खोल लें।
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