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Easter Eggs 2026: ईस्टर संडे के दिन अंडों को क्यों रंगा जाता है? जानें ईसाई धर्म में इसके पीछे की क्या है मान्यताएं

Easter Sunday 2026: आज ईस्टर संडे है और यह दिन ईसाई धर्म से जुड़े लोगों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन अंडों को रंगने की परंपरा है। तो आइए जानते हैं कि ईस्टर के दिन अंडों को क्यों रंगा जाता है।

ईस्टर 2026- India TV Hindi
Image Source : PEXELS ईस्टर 2026

Easter Eggs 2026: आज यानी रविवार को ईस्टर का पर्व मनाया जा रहा है। ईसाई धर्म में विश्वास रखने वालों के लिए आज का दिन अत्यंत ही महत्वपूर्ण  है। ईस्टर संडे के दिन चर्च में विशेष प्रार्थना सभाएं आयोजित की जाती है। ईसाई धर्म से जुड़े लोग इस दिन कैंडल जलाते हैं और पवित्र गीत गाते हैं।इसके साथ ही ईस्टर के दिन अंडों को सुंदर रंगों से सजाने की भी परंपरा है। इस दिन अंडों पर तरह-तरह के डिजाइन भी बनाए जाते हैं। इसके बाद इन सुंदर अंडों को लोग एक-दूसरे को उपहार में देते हैं।  तो आइए जानते है कि ईस्टर के दिन अंडों को क्यों रंगा जाता है।

ईस्टर के दिन अंडों को रंगों से क्यों सजाया जाता है?

ईस्टर के दिन अंडों का विशेष महत्व होता है। कहा जाता है कि ईस्टर संडे के दिन अंडों को रंगने की परंपरा 13वीं शताब्दी से चली आ रही है। ईस्टर एग्स को को नए जीवन के जन्म का प्रतीक माना जाता है। अंडे से भी नया जीवन निकलता है जैसे ईसा मसीह दोबारा जीवित हो गए थे। शुरुआत में ईस्टर के दिन अंडों को लाल रंग से रंगा जाता था, जो ईसा मसीह के सूली पर बहाए गए खून का प्रतीक है। यह परंपरा मेसोपोटामिया के शुरुआती ईसाइयों से शुरू हुई मानी जाती है। ईस्टर संडे के दिन ईस्टर एग हंट भी काफी प्रचलित है। इसमें प्लास्टिक या असली अंडों को घर या बगीचे में छिपा दिया जाता है और बच्चे उन्हें ढूंढते हैं। यह खेल बच्चों को ईस्टर के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व से भी जोड़ता है।

ईस्टर का महत्व

गुड फ्राइडे के बाद आने वाले संडे यानी रविवार के दिन ईस्टर मनाया जाता है। ईसाई धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था। इसके बाद ईसा मसीह पुनर्जीवित हो गए थे। जिस दिन ईसा मसीह पुनर्जीवित हुए थे उस दिन संडे था इसीलिए इसे ईस्टर संडे कहते हैं। यह त्यौहार बताता है कि अंधकार के बाद प्रकाश, दुख के बाद आनंद और मृत्यु के बाद नया जीवन आता है। ईस्टर ईसाई धर्म के विश्वास का केंद्र है, जहां दुःख आनंद में बदल जाता है और मृत्यु जीवन को रास्ता देती है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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