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Maa Katyayani Aarti: जय जय अम्बे जय कात्यायनी.. नवरात्रि के छठे दिन करें मां कात्यायनी की महिमा का बखान, नोट कर लें आरती के संपूर्ण लिरिक्स

Maa Katyayani Aarti Lyrics In Hindi: नौ दिवसीय चैत्र नवरात्रि 2026 का पर्व देश भर में मनाया जा रहा है। हर दिन देवी दुर्गा के अलग स्वरूप की उपासना की जाती है। छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। पूजा के बाद उनकी आरती जरूर करनी चाहिए। यहां पढ़िए संपूर्ण आरती।

Maa Katyayani aarti lyrics मां कात्यायनी का आरती- India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मां कात्यायनी का आरती

Maa Katyayani Aarti Lyrics In Hindi: माना जाता है कि इन नौ दिनों में माता रानी की ऊर्जा ब्रह्मांड में सबसे ज्यादा सक्रिय होती है। नवरात्रि का प्रत्येक दिन मां भगवती के एक विशेष स्वरूप की साधना के लिए समर्पित होता है। मां कात्यायनी नवरात्रि के छठे दिन की देवी हैं। देवी कात्यायनी शक्ति, सौंदर्य और साहस की प्रतीक मानी जाती हैं। ये शक्ति का दिव्य स्वरूप हैं और राक्षसों के संहार के लिए जानी जाती हैं। ऐसा कहा जाता है कि देवी कात्यायनी अभय और वरदान देने वाली हैं। नवरात्रि के दिन माता कात्यायनी के नाम का व्रत रख जाता है, सुबह-शाम इनकी विधि-विधान से पूजा की जाती है। पूजा के बाद आरती गाने से माता प्रसन्न होती हैं। यहां पढ़िए देवी कात्यायनी को समर्पित आरती के संपूर्ण लिरिक्स। 

मां कात्यायनी की आरती-1 (Maa Katyayani Ki Aaarti)

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जय महारानी॥

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा॥

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है॥

हर मंदिर में जोत तुम्हारी।
कहीं योगेश्वरी महिमा न्यारी॥

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मंदिर में भक्त हैं कहते॥

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की॥

झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली॥

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिए॥

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी॥

मां कात्यायनी की आरती-2 (Maa Katyayani Ki Aaarti)

जय कात्यायनी माँ, मैया जय कात्यायनी माँ ।
उपमा रहित भवानी, दूँ किसकी उपमा ॥ मैया जय... 

गिरजापति शिव का तप, असुर रम्भ कीन्हाँ ।
वर-फल जन्म रम्भ गृह, महिषासुर लीन्हाँ ॥ मैया जय...

कर शशांक-शेखर तप, महिषासुर भारी ।
शासन कियो सुरन पर, बन अत्याचारी ॥ मैया जय... 

त्रिनयन ब्रह्म शचीपति, पहुँचे, अच्युत गृह ।
महिषासुर बध हेतू, सुर कीन्हौं आग्रह ॥ मैया जय...

सुन पुकार देवन मुख, तेज हुआ मुखरित ।
जन्म लियो कात्यायनी, सुर-नर-मुनि के हित ॥ मैया जय...

अश्विन कृष्ण-चौथ पर, प्रकटी भवभामिनि ।
पूजे ऋषि कात्यायन, नाम काऽऽत्यायिनी ॥ मैया जय... 

अश्विन शुक्ल-दशी को, महिषासुर मारा ।
नाम पड़ा रणचण्डी, मरणलोक न्यारा ॥ मैया जय...

दूजे कल्प संहारा, रूप भद्रकाली ।
तीजे कल्प में दुर्गा, मारा बलशाली ॥ मैया जय...

दीन्हौं पद पार्षद निज, जगतजननि माया ।
देवी सँग महिषासुर, रूप बहुत भाया ॥ मैया जय...

उमा रमा ब्रह्माणी, सीता श्रीराधा ।
तुम सुर-मुनि मन-मोहनि, हरिये भव-बाधा ॥ मैया जय...

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