Makar Sankranti Rules: मकर संक्रांति हिंदू धर्म के सबसे पावन और खगोलीय दृष्टि से महत्वपूर्ण पर्वों में से एक है। सनातन धर्म में मकर संक्रांति (Makar Sankranti 2026) को सूर्य देव से जुड़ा अत्यंत पावन पर्व माना गया है। इस दिन सूर्य भगवान धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करते हैं और उत्तरायण की शुरुआत होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, उत्तरायण काल को देवताओं का दिन कहा जाता है और इस दिन किए गए स्नान, दान और पूजा का विशेष फल मिलता है। हालांकि, इस शुभ दिन कुछ नियमों की अनदेखी करने से इसका विपरीत असर भी पड़ सकता है।
सूर्य देव का मकर राशि में प्रवेश क्यों है खास
मकर संक्रांति के दिन सूर्य देव मकर राशि में प्रवेश करते हैं, जिसे ऊर्जा, अनुशासन और सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है। इसी दिन से सूर्य की गति उत्तर दिशा की ओर हो जाती है, जो शुभता और उन्नति का संकेत मानी जाती है।
स्नान और सूर्य को अर्घ्य देने का महत्व
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र जल से स्नान करना शुभ होता है। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित करना चाहिए। बिना स्नान किए भोजन करना इस दिन वर्जित माना गया है।
भोजन से जुड़ी सावधानियां
मकर संक्रांति पर सूर्यास्त के बाद भोजन करने से बचना चाहिए। इस दिन सात्विक भोजन अपनाने की सलाह दी जाती है। तिल और गुड़ से बने व्यंजन खाने और दान करने से सूर्य देव प्रसन्न होते हैं।
इन चीजों का सेवन न करें
इस पर्व पर लहसुन, प्याज, मांस, शराब और अन्य तामसिक भोजन का सेवन वर्जित माना गया है। कई जगहों पर इस दिन रोटी बनाने से भी परहेज किया जाता है और खिचड़ी को विशेष पुण्यदायी भोजन माना जाता है।
वृक्षों और फसलों की कटाई से क्यों बचें
मकर संक्रांति के दिन पेड़ों की कटाई या पौधों की छंटाई नहीं करनी चाहिए। यही कारण है कि कई किसान इस दिन फसल काटने से भी बचते हैं। ऐसा माना जाता है कि इससे प्रकृति और सूर्य देव दोनों की कृपा बनी रहती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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