सावन माह में हरियाली अमावस्या विशेष पुण्यकारी मानी जाती है। इस दिन स्नान तथा दीन-हीन, असहाय लोगों को दान देने से साधकों को पितृ दोष, कालसर्प दोष और शनि दोष से मुक्ति मिलती है। इस अमावस्या पर पौधे लगाना बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन पितृ तर्पण, स्नान, दान और पुण्य कर्मों के लिए सावन अमावस्या को बहुत शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिन स्नान-दान करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है। 24 जुलाई को सावन अमावस्या मनाई जा रही है। ऐसे में हरियाली अमावस्या के क्या पूजा विधि और महत्व है आइए जानते है...
हरियाली अमावस्या का शुभ मुहूर्त
सावन मास का आरंभ 24 जुलाई प्रात: 02.29 बजे से हो रहा है, 25 जुलाई की रात 12.41 बजे समाप्त होगी। उदया तिथि के मुताबिक, 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या मनाई जाएगी। कर्नाटक में इसे भीमना अमावस्या भी कहा जाता है।
गरुण पुराण के मुताबिक, सावन अमावस्या तिथि पर पितरों का तर्पण करने से पूर्वजों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। वहीं, व्यक्ति विशेष को पितृदोष से भी छुटकारा मिलता है।
हरियाली अमावस्या की पूजा विधि
सुबह स्नान करके साफ वस्त्र धारण करें। फिर घर के मंदिर की सफाई करें और एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। फिर भगवान शिव व मां पार्वती की प्रतिमा या शिवलिंग स्थापित करें। इसके बाद शिवलिंग पर गंगाजल, दूध,दही, शहद, घी और पंचामृत चढ़ाएं। फिर बेलपत्र , धतूरा के फूल, भांग, इत्र और चंदन अर्पित करें। इसके बाद शिव जी के मंत्रों का जप करें और शिव चालीसा पढ़ें। इसके बाद अपने पूवर्जों को जल और तिल से तर्पण करें। अंत में जरूरतमंद और गरीबों में भोजन, धन और वस्त्र दान करें।
क्या है इसका महत्व?
इस अमावस्या में विशेष रूप से पिंडदान और पितृ पूजन होता है, ऐसे में इसे श्राद्ध अमावस्या भी कहते हैं। इस दिन पितृ पूजन से पितरों की आत्मा को शांति मिल जाती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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