Vijaya Ekadashi Story: 13 फरवरी को विजया एकादशी का व्रत रखा जाएगा। हर साल फाल्गुन माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी का व्रत करने का विधान है। इस दिन उपवास रखने और विधिपूर्वक पूजा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है। इस एकादशी के दिन भगवान विष्णु की पूजा से जातक के सभी कष्ट दूर होते हैं। विजया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को हर काम में सफलता प्राप्त होती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान राम ने भी लंका पर चढ़ाई करने से पहले इस व्रत का पालन किया था, जिससे उन्हें विजय हासिल हुई थी। तो आइए यहां जानते हैं विजया एकादशी व्रत की कथा और शुभ मुहूर्त के बारे में।
विजया एकादशी व्रत कथा
त्रेता युग में जब भगवान श्रीराम जब लंका पर चढ़ाई करने के लिए समुद्र पार करने का उपाय ढूंढ रहे थे, इसी दौरान महर्षि वशिष्ठ के कहने पर उन्होंने विजया एकादशी का व्रत किया। इससे भगवान खुश हुए और फलस्वरूप लंका पर विजय प्राप्त हुई और फिर वे अयोध्या वापस लौटे। पौराणिक कथा के अनुसार, जब त्रेता युग में भगवान राम अपनी सेना के साथ मां सीता जो बचाने के लिए लंका पर चढ़ाई करने जा रह थे, उनके सामने समुद्र लांघने और रावण को हराने जैसा कठिन लक्ष्य था। इस लिए भगवान राम ने वकदाल्भ्य ऋषि को अपने मन की बात बताई और इसका हल पूछा। इस पर वकदाल्भ्य ने श्रीराम को सेना सहित फाल्गुन माह कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि पर व्रत रखने की सलाह दी। भगवान राम, लक्ष्मण और हनुमान जी से साथ पूरी वानर सेना ने ऋषि के कहे मुताबिक व्रत किया और पूरे विधि-विधान से पूजा-अर्चना की। इस पर उन्हें एकादशी का पुण्यफल प्राप्त हुआ और युद्ध में विजय मिली। कहा जाता है कि श्रीकृष्ण ने युधिष्ठिर को भी विजया एकादशी व्रत करने की सलाह दी थी।
विजया एकादशी 2026 शुभ मुहूर्त और पारण का समय
- एकादशी तिथि प्रारंभ- 12 फरवरी को 12:22 पी एम बजे
- एकादशी तिथि समाप्त- 13 फरवरी को 02:25 पी एम बजे
- विजया एकादशी पारण तिथि- 14 फरवरी 2026
- पारण (व्रत तोड़ने का) समय - 14 फरवरी को 07:07 ए एम से 09:26 ए एम
- पारण तिथि के दिन द्वादशी समाप्त होने का समय- 04:01 पी एम
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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