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Sheetala Saptami: शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है, क्या है बसोड़ा पूजा का महत्व

Sheetala Saptami 2026: 11 मार्च को शीतला सप्तमी मनाई जाएगी। हिंदू धर्म में शीतला सप्तमी का विशेष महत्व है। तो आइए जानते हैं कि शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है।

शीतला सप्तमी 2026- India TV Hindi Image Source : FILE IMAGE शीतला सप्तमी 2026

Sheetala Saptami 2026: हर साल चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि को शीतला सप्तमी का त्यौहार मनाया जाता है। यह दिन माता शीतला को समर्पित है। इस दिन मां शीतला की उपासना करना अत्यंत ही फलदायी होता है। आपको बता दें कि शीतला सप्तमी के बाद शीतला अष्टमी का व्रत रखा जाता है। शीतला अष्टमी के दिन जो भोग देवी मां को चढ़ाया जाता है उसे सप्तमी तिथि के दिन ही तैयार किया जाता है। इसलिए भी शीतला सप्तमी का दिन बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है।

शीतला सप्तमी 2026 शुभ मुहूर्त

शीतला सप्तमी 10 मार्च 2026 को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का आरंभ 9 मार्च को रात 11 बजकर 47 मिनट पर होगा। सप्तमी तिथि का समापन 11 मार्च की मध्यरात्रि 1 बजकर 54 मिनट पर होगा। शीतला सप्तमी पूजा मुहूर्त 10 मार्च को सुबह 6 बजकर 37 मिनट से शाम 6 बजकर 26 मिनट तक रहेगा।

बसोड़ा पूजा का महत्व

शीतला अष्टमी को बसोड़ा पूजा के नाम से भी जाना जाता है। यह दिन देवी शीतला को समर्पित है। इस दिन महिलाएं शीतला माता का व्रत बच्चों के अच्छे स्वास्थ्य के लिए रखती हैं। इतना ही नहीं इस व्रत को रखने से अखंड सौभाग्य का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बसोड़ा पूजा के दिन देवी शीतला की पूजा-अर्चना करने से खसरा और चेचक जैसे रोगों से मुक्ति मिलती है। 

शीतला सप्तमी क्यों मनाई जाती है?

शीतला सप्तमी के दिन भी माता शीतला की उपासना की जाती है। बसोड़ा के दिन शीतला माता को बासी खाना का भोग चढ़ाया जाता है, जिसे शीतला सप्तमी के दिन रात में ही तैयार कर लिया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि माता शीतला को ठंडी चीजें अति प्रिय है, इसलिए बसोड़ा के दिन देवी मां को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है और इसी को प्रसाद के रूप में व्रती ग्रहण करते हैं। 

माता शीतला को ये चीजें हैं प्रिय

  • मीठे चावल
  • चावल और घी
  • आटे और गुड़ से बना पुआ या गुलगुले
  • दही चावल
  • रबड़ी
  • बिना नमक की पूड़ी
  • कढ़ी

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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