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Masik Durgashtmi: मासिक दुर्गाष्टमी व्रत रखा जाएगा 24 फरवरी को, जानें शुभ पूजा मुहूर्त और विधि

Masik Durgashtmi: फाल्गुन माह में मासिक दुर्गाष्टमी का व्रत 24 तारीख को रखा जाएगा। इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब है और पूजा किस विधि से आपको करनी चाहिए आइए इस बारे में जानते हैं।

Masik durgashtmi - India TV Hindi
Image Source : INDIA TV मासिक दुर्गाष्टमी 2026

Masik Durgashtmi: मासिक दुर्गाष्टमी व्रत हर माह में अष्टमी तिथि को रखा जाता है। फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 24 फरवरी को है इसलिए इस दिन माता दुर्गा की पूजा और दुर्गाष्टमी का व्रत रखा जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार दुर्गाष्टमी का व्रत रखने से माता दुर्गा की असीम कृपा भक्तों पर बरसती है और मनोकामनाएं पूरी होती हैं। आइए ऐसे में जान लेते हैं कि मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब से कब तक रहेगा और इस दिन किस विधि से आपको माता की पूजा करनी चाहिए। 

मासिक दुर्गाष्टमी पूजा का शुभ मुहूर्त 

हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि 24 फरवरी को सुबह 7 बजकर 1 मिनट पर शुरू होगी और 25 फरवरी को सुबह 4 बजकर 51 मिनट पर समाप्त होगी। ऐसे में दुर्गाष्टमी का व्रत 24 फरवरी को ही मनाया जाएगा। वहीं एकादशी व्रत का पारण 25 फरवरी को होगा। मासिक दुर्गाष्टमी के दिन पूजा के लिए शुभ मुहूर्त नीचे दिए गए हैं। 

  • ब्रह्म मुहूर्त- 05:23 AM से 06:12 AM तक
  • प्रातः सन्ध्या - 05:47 AM से 07:01 AM तक
  • सुबह 7 बजकर 1 मिनट से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा इसलिए सुबह 10 बजे तक आप एकादशी व्रत की पूजा कर सकते हैं। 
  • गोधूलि मुहूर्त- 06:40 PM से 07:05 PM तक
  • सायाह्न सन्ध्या- 06:42 PM से 07:56 PM तक

दुर्गाष्टमी पूजा विधि 

  • दुर्गाष्टमी के व्रत के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर आपको स्नान ध्यान करना चाहिए और पूजा स्थल की भी सफाई भी करनी चाहिए। 
  • इसके बाद स्वच्छ वस्त्र पहनकर पूजा स्थल में बैठें और हाथ में जल लेकर व्रत का संकल्प आपको लें।
  • फिर चौकी पर लाल वस्त्र के ऊपर माता की प्रतिमा या तस्वीर लगाएं। इसके बाद दीपक और धूप जलाएं।
  • माता का गंगाजल से अभिषेक करें, सिंदूर, फूल, सोलह श्रृंगार माता को अर्पित करें। 
  • इसके बाद माता के मंत्रों का जप करें। साथ ही दुर्गा चालीसा या दुर्गा सप्तशती का पाठ भी आप कर सकते हैं। 
  • भोग के रूप में माता को फल, मिठाई, हलवा-पूरी आप अर्पित कर सकते हैं। 
  • पूजा के अंत में माता की आरती का पाठ आपको करना चाहिए। 

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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