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Hindi News धर्म Nadi Dosh: कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या होता है और क्यों माना जाता है अशुभ? जानें कुंडली के इस दोष को दूर करने के उपाय

Nadi Dosh: कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या होता है और क्यों माना जाता है अशुभ? जानें कुंडली के इस दोष को दूर करने के उपाय

Nadi Dosh Effects and Remedies: नाड़ी दोष कुंडली मिलान का एक महत्वपूर्ण पहलू है, जिसका संबंध जन्म नक्षत्र और नाड़ी से होता है। हालांकि इसे अशुभ माना जाता है, लेकिन ज्योतिष शास्त्र में इसके कई अपवाद और उपाय भी बताए गए हैं, जिन्हें जानना जरूरी है।

Nadi Dosh Effects and Remedies- India TV Hindi Image Source : INDIA TV कुंडली मिलान में नाड़ी दोष क्या होता है

Nadi Dosh Effects and Remedies: सनातन परंपरा में शादी से पहले लड़का-लड़की की कुंडली मिलान को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कुंडली मिलान के दौरान कई चीजों को तो अनदेखा कर दिया जाता है, जो वैवाहिक जीवन पर नकारात्नक असर नहीं डालते। लेकिन कई दोषों पर बहुत ध्यान दिया जाता है। इसमें से एक हैं नाड़ी दोष, जिसे सबसे गंभीर माना जाता है। चलिए जानते हैं कि आखिर नाड़ी दोष क्या होता है और इसे सुखी दाम्पत्य जीवन के लिए क्यों शुभ माना जाता है। इस दोष को कम करने के उपाय भी जानेंगे। 

इसके नाम से ही बढ़ जाती है टेंशन

सनातन धर्म में ऐसी मान्यता है कि वर और वधू की कुंडली के 36 गुणों का मिलान करके उनके भविष्य के वैवाहिक जीवन, आपसी तालमेल और सुख-दुख का अनुमान लगाया जा सकता है। ऐसे में अगर कुंडली मिलान पर नाड़ी दोष निकल आए, तो इसका नाम सुनते ही अक्सर दोनों परिवारों में चिंता बढ़ जाती है। कुछ जगहों पर तो इसे इतनी गंभीरता से लिया जाता है कि रिश्ता बढ़िया होने के बावजूद इस एक दोष के कारण बातचीत ही आगे नहीं बढ़ाई जाती है। 

कुंडली मिलान क्यों है जरूरी

कुंडली मिलान का उद्देश्य केवल गुणों की संख्या देखना नहीं होता, बल्कि वर-वधू के बीच मानसिक, भावनात्मक और शारीरिक सामंजस्य को परखना भी होता है। इसके जरिए स्वास्थ्य, संतान सुख, आर्थिक स्थिरता और दांपत्य जीवन की संभावनाओं का आकलन किया जाता है।

कुंडली मिलान में नाड़ी का क्या अर्थ है

36 गुणों में नाड़ी को 8 गुणों का स्थान दिया गया है, जो इसे सबसे महत्वपूर्ण बनाता है। नाड़ी का संबंध जन्म नक्षत्र से होता है और इसे तीन भागों में बांटा गया है। इसमें आदि नाड़ी, मध्य नाड़ी और अंत नाड़ी शामिल है। अगर लड़का और लड़की दोनों की नाड़ी एक जैसी हो, तो इसे नाड़ी दोष कहा जाता है।

नाड़ी दोष को अशुभ क्यों माना जाता है

पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार नाड़ी दोष होने पर विवाह के बाद स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं, संतान सुख में बाधा और आपसी तनाव हो सकता है। कुछ लोग इसे आर्थिक परेशानी और रिश्तों में अस्थिरता से भी जोड़ते हैं। इसी कारण इसे कुंडली मिलान में गंभीर दोष माना जाता है।

क्या हर स्थिति में नाड़ी दोष खतरनाक होता है

आधुनिक ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि केवल नाड़ी दोष के आधार पर विवाह को अस्वीकार करना उचित नहीं है। कुंडली में मौजूद अन्य ग्रह योग, दशाएं और संतुलन भी उतने ही महत्वपूर्ण होते हैं। कई मामलों में नाड़ी दोष के बावजूद वैवाहिक जीवन सुखद देखा गया है।

किन स्थितियों में नाड़ी दोष प्रभावी नहीं माना जाता

ज्योतिष शास्त्र में नाड़ी दोष के कुछ अपवाद बताए गए हैं। यदि वर-वधू का नक्षत्र समान हो लेकिन चरण अलग हों, तो दोष का प्रभाव कम हो जाता है। इसी तरह जन्म राशि समान और नक्षत्र अलग होने पर भी नाड़ी दोष हल्का माना जाता है। इसलिए पूरी कुंडली का विश्लेषण आवश्यक है।

नाड़ी दोष के उपाय

शास्त्रों में नाड़ी दोष के प्रभाव को कम करने के लिए कुछ उपाय बताए गए हैं। महामृत्युंजय मंत्र का नियमित जाप, दान-पुण्य, अनाज या वस्त्र दान और गौ सेवा जैसे कार्य लाभकारी माने जाते हैं। इन उपायों से मानसिक शांति मिलती है और नकारात्मक प्रभाव कम होता है।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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