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Hindi News धर्म Premanand Maharaj: जब प्रेमानंद महाराज ने अपने पिता से कहा “मैं संत बनना चाहता हूं…” जानिए क्या मिला था जवाब

Premanand Maharaj: जब प्रेमानंद महाराज ने अपने पिता से कहा “मैं संत बनना चाहता हूं…” जानिए क्या मिला था जवाब

संत प्रेमानंद महाराज भारत के सबसे लोकप्रिय आध्यात्मिक गुरुओं में से एक हैं जिन्हें करोड़ों लोग फॉलो करते हैं। बहुत कम ही लोग ये जानते होंगे कि उन्होंने अध्यात्म के मार्ग पर चलने का फैसला छोटी सी उम्र में ही ले लिया था जिसके लिए उन्होंने अपने घर तक का त्याग कर दिया था। जानिए इस पर उनके पिता जी ने क्या प्रतिक्रिया दी थी।

premanand maharaj- India TV Hindi Image Source : BHAJAN MARG प्रेमानंद महाराज

Premanand Maharaj: प्रेमानंद महाराज का जीवन केवल आध्यात्मिक साधना की यात्रा नहीं, बल्कि त्याग, समर्पण और धैर्य की कहानी भी है। भगवान की भक्ति और सेवा के लिए उन्होंने कम उम्र में ही अपने घर का त्याग कर दिया था। उन्होंने बचपन में ही ये निर्णय ले लिया था कि अब उनका जीवन भगवान का है। जब महाराज जी ने इस बारे में अपने पिता को बताया तो जानिए उनका क्या रिएक्शन था और महाराज जी को अपने पिता से क्या सीख मिली थी।

संत बनने के लिए घर का कर दिया था त्याग

प्रेमानंद महाराज ने बताया कि जिस दिन हम घर से भागे उसके तीन दिन बाद हमारे पिता जी ने हमें पकड़ लिया। हमनें देखा पिता जी आ रहे हैं तो हम आंख बंद करके बैठ गए। वो नजदीक आए और कहने लगे कि उठ खड़ा हो। हम नहीं खड़े हुए लेकिन जब उन्होंने तीसरी बार कहा तो हम खड़े हो गए क्योंकि अब हमें लगा कि अगर अब नहीं उठे तो चौथी बार में डंडा ही पड़ेगा। हमने पिता जी से कहा कि आपसे एक प्रार्थना करें तो उन्होंने कहा बताओ। हमने कहा कि हमारी जिंदगी भगवान के नाम है अब आप चाहे तो काट डालों क्योंकि ना हम घर जाएंगे और ना ही आपकी बात मानेंगे। इसके बाद एकदम से पिता जी का मन बदल गया जैसे भगवान की कृपा बनी हो। उन्होंने कहा कि सच कह रहे हो। घर नहीं जाओगे? हमने कहा नहीं। आगे पिता जी ने कहा कि शादी नहीं करोगे हमने कहा नहीं।

उसके बाद उन्होंने हमें छाती से लगा लिया और तीन बार राम-राम-राम कहा। तब पिता जी कहने लगे कि जाओ जिंदगी में तुम्हारा कोई बाल भी बांका नहीं कर सकता। लेकिन कहा एक बात ध्यान रखना कि अगर बाबा जी बनते हो तो हमारा आशीर्वाद है कि अगर ऊसर में भी बैठोगे तो फूल बरसेंगे और अगर किसी की बहन बेटी देखी तो.. तब हमने पिता जी से कहा कि जिंदगी में आप इस बात को कभी नहीं सुनोगे। प्रेमानंद महाराज जी आगे कहते हैं कि पिता जी तो चले गए पर उनका आशीर्वाद आज भी बना हुआ है क्योंकि माता-पिता का आशीर्वाद भगवान का आशीर्वाद होता है।

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