Aparajita Plant Jyotish Upay: सनातन परंपरा में कई ऐसे पौधे और फूल बताए गए हैं, जिनका संबंध केवल सौंदर्य से नहीं बल्कि भाग्य, समृद्धि और सकारात्मक ऊर्जा से भी जुड़ा होता है। इन्हीं में से एक है अपराजिता का फूल, जिसे नीले रंग की वजह से विशेष पहचान मिली है। धार्मिक और ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार, सही दिशा और विधि से लगाया गया अपराजिता का पौधा जीवन में सुख, शांति और आर्थिक मजबूती ला सकता है। आखिर क्यों ज्योतिष और वास्तु शास्त्र में इस पौधे को बेहद खास माना गया है और इसे लगाने की सबसे सही दिशा कौन-सी होती है? आइए जानते हैं इस आर्टिकल में सबकुछ
अपराजिता का फूल क्यों माना जाता है शुभ
अपराजिता का फूल अपनी आकर्षक नीली आभा के साथ-साथ गहरे धार्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। हालांकि, अब यह फूल और भी कई रंगों में उपलब्ध होता है। हिंदू मान्यताओं के अनुसार, यह फूल भगवान विष्णु और शनिदेव को अत्यंत प्रिय है। इसी कारण इसका उपयोग पूजा-पाठ और विशेष ज्योतिषीय उपायों में किया जाता है।
ज्योतिष शास्त्र में अपराजिता का महत्व
ज्योतिष के अनुसार, अपराजिता का पौधा घर में लगाने से नारायण भगवान, माता लक्ष्मी और शनिदेव की कृपा बनी रहती है। कई मान्यताओं में बताया गया है कि इससे आर्थिक परेशानियां कम होती हैं और भाग्य का सहयोग मिलने लगता है। यह पौधा जीवन में स्थिरता और सफलता को बढ़ावा देता है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार अपराजिता
वास्तु शास्त्र में अपराजिता के पौधे को सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत माना गया है। विशेषज्ञों के अनुसार इसे घर की पूर्व, उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना विशेष रूप से शुभ होता है। इससे नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और घर का वातावरण शांत और संतुलित बना रहता है।
धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व
धार्मिक मान्यताओं में अपराजिता के फूल को पवित्र माना गया है। गुरुवार को इसे भगवान विष्णु और शुक्रवार को माता लक्ष्मी से जोड़कर देखा जाता है। इन दिनों पौधा लगाने या फूल अर्पित करने से धन और सौभाग्य में वृद्धि मानी जाती है।
किस दिशा में लगाना होता है सबसे शुभ?
वास्तु के अनुसार, अपराजिता का पौधा ईशान कोण यानी उत्तर-पूर्व दिशा में लगाना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह दिशा देवी-देवताओं से जुड़ी होती है, जिससे घर में सुख, शांति और समृद्धि का वास होता है। पूर्व दिशा में लगाने से भी नकारात्मकता दूर होती है।
(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)
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