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भगवान जी को रोज लगाते हैं भोग, क्या आप जानते हैं नैवेद्य लगाने का कारण और महत्व? ये है इसके पीछे का आध्यात्मिक रहस्य

 Written By: Arti Azad @Azadkeekalamse
 Published : Jan 02, 2026 09:45 pm IST,  Updated : Jan 02, 2026 09:45 pm IST

Bhog Tradition: ज्यादातर हिंदू परिवारों में भगवान को भोग अर्पित करने का विधान है, जो समर्पण और कृतज्ञता का प्रतीक है। इससे भोजन में मौजूद दोष दूर होते हैं और साधारण भोजन 'प्रसाद' बन जाता है, जो मन में सात्विकता और शांति लाता है।

Bhog Tradition- India TV Hindi
भगवान को भोग क्यों लगाते हैं Image Source : PEXELS

Bhagwan Ko Bhog Lagane Ki Parampara: आपने बचपन से देखा होगा हमारे घर में खाना बनने के बाद सबसे पहले उसका भोग घर के मंदिर में विराजे देवी-देवताओं को लगाया जाता है। सदियों से यह परंपरा चली आ रही कि रोजाना हिंदू परिवारों में सबके भोजन ग्रहण करने से पहले भगवान जी को भोग अर्पित किया जाता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि ऐसा क्यों किया जाता है? भोग लगाने से कैसे मिलती है अन्न दोष से मुक्ति?

सनातन धर्म हर क्रिया के पीछे एक गहरा संदेश छिपा होता है। देवी-देवताओं को भोग अर्पित करना भी इन्हीं में से एक है, जो एक गहरा आध्यात्मिक अर्थ रखता है। यह केवल रिवाज या परंपरा नहीं, बल्कि यह भक्त के कृतज्ञ भाव, अहंकार त्याग और आंतरिक शांति का प्रतीक है। भगवान को भोग देने का वास्तविक उद्देश्य भोजन को साधारण से प्रसाद में बदलना और अन्न दोष से मुक्ति पाना है।

भोग का अर्थ: समर्पण और कृतज्ञता

भगवान को भोग लगाना केवल भोजन अर्पित करने की क्रिया या धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि ईश्वर के प्रति आभार प्रकट करने का माध्यम है। यह मन, आत्मा और भोजन को शुद्ध करने का उपाय भी है। भगवान भोजन के भौतिक अंश को नहीं, बल्कि भक्त के ‘भाव’ को ग्रहण करते हैं। यह प्रक्रिया मन में सेवा भाव और अहंकार का अंत करती है।

भोजन से 'प्रसाद' बनने की प्रक्रिया

जब भोजन भगवान को अर्पित किया जाता है, तो वह साधारण भोजन नहीं रह जाता। मंत्रों और भगवान की दृष्टि से वह 'महाप्रसाद' बन जाता है। भगवद्गीता में भी उल्लेख है कि भक्त का प्रेम और भक्ति भाव भगवान को प्रिय होता है, चाहे वह पत्र, पुष्प, जल या भोजन ही क्यों न हो। इस तरह से ईश्वर को भोग लगाने से भक्त की सात्विकता बढ़ती है और अन्न दोष से मुक्ति मिलती है, जिससे ग्रहण किया गया अन्न व्यक्ति और उसके पूरे परिवार के लिए लाभकारी और पवित्र बन जाता है।

अन्न दोष क्या होता है?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भोजन केवल पेट भरने का साधन नहीं है, बल्कि उसका सीधा असर मन और जीवन पर भी पड़ता है। जब भोजन किसी प्रकार की अशुद्धता या नकारात्मकता से जुड़ा होता है, तो उसे अन्न दोष कहा जाता है।

अन्न दोष के कारण कैसे बनते हैं?

  1. अगर भोजन ऐसे धन से तैयार किया गया हो, जो अनुचित तरीकों से अर्जित किया गया हो, तो उसमें नकारात्मक ऊर्जा मानी जाती है।
  2. इसके अलावा, यदि भोजन अस्वच्छ वातावरण में या बिना शुद्धता के बनाया जाए, तो भी दोष उत्पन्न हो सकता है।
  3. साथ ही, भोजन बनाने वाले व्यक्ति के मन में क्रोध, तनाव या ईर्ष्या जैसे भाव हों, तो उसका असर भोजन पर पड़ता है।

भोग लगाने से कैसे मिलती है अन्न दोष से मुक्ति?

जब भोजन को श्रद्धा और विश्वास के साथ भगवान को अर्पित किया जाता है, तो माना जाता है कि उसकी नेगेटिविटी खतम हो जाती है। भोग के बाद वही भोजन प्रसाद बन जाता है, जो शरीर और मन दोनों को शुद्ध करता है।

(Disclaimer: यहां दी गई जानकारियां धार्मिक आस्था और लोक मान्यताओं पर आधारित हैं। इसका कोई भी वैज्ञानिक प्रमाण नहीं है। इंडिया टीवी एक भी बात की सत्यता का प्रमाण नहीं देता है।)

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