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पितृ पक्ष में कितने प्रकार से होता है श्राद्ध? जानें शास्त्रों में बताए गए इन मुख्य रूपों का महत्व!

 Written By: Acharya Indu Prakash,  Edited By: Vineeta Mandal
 Published : Sep 28, 2026 11:16 pm IST,  Updated : Sep 28, 2026 11:16 pm IST

पितृ पक्ष में पितरों का श्राद्ध करने का विधान है। इससे पितृ संतुष्ट और तृप्त होते हैं। पितरों का श्राद्ध करने से पूर्वजों का खास कृपा प्राप्त होता है। आपको बता दें कि श्राद्ध कई प्रकार के होते हैं जिनका विशेष धार्मिक महत्व बताया गया है।

पितृ पक्ष 2026- India TV Hindi
पितृ पक्ष 2026 Image Source : INDIA TV

हिंदू धर्म में पितृ पक्ष का विशेष महत्व बताया गया है। इस दौरान पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और कृतज्ञता प्रकट किया जाता है। धार्मिक मान्यता है कि पितृ पक्ष में पूर्वज धरती लोक पर आते हैं और अपने वंशजों पर आशीर्वाद बरसाते हैं। ऐसे में पितृ पक्ष में पितरों का स्मरण और पूजन करना चाहिए। पितरों की आत्मा की शांति और मोक्ष के लिए श्राद्ध कर्म, तर्पण और पिंडदान किया जाता है। भविष्य पुराण के अनुसार, श्राद्ध केवल एक ही तरीके से नहीं बल्कि अलग-अलग स्थितियों और उद्देश्यों के आधार पर कई प्रकार से किया जाता है। तो आइए जानते हैं कि श्राद्ध के मुख्य प्रकार और उनके धार्मिक महत्व के बारे में।

भविष्य पुराण के अनुसार कुल 12 प्रकार के श्राद्ध होते हैं- 

1. नित्य श्राद्ध- यह श्राद्ध जल द्वारा, अन्न द्वारा प्रतिदिन होता है। श्राद्ध- विश्वास से किये जाने वाले देवपूजन, माता-पिता एवं गुरूजनों के पूजन को नित्य श्राद्ध कहते हैं। अन्न के अभाव में जल से भी श्राद्ध किया जाता है। इसे करने से मनुष्य हर दिन तरक्की की नयी सीढ़ी चढ़ता है।

2. नैमित्तिक श्राद्ध- किसी एक को निमित्त बनाकर जो श्राद्ध किया जाता है, उसे नैमित्तिक श्राद्ध कहते हैं। इसे करने से स्मरण शक्ति बढ़ती है। आपका बौद्धिक लेवल अच्छा होता है।

3. काम्य श्राद्ध- जो कुछ कामना रखकर किया जाता है, उसे काम्य श्राद्ध कहते हैं। इसे करके मनुष्य बड़ी से बड़ी उपलब्धियों को प्राप्त कर सकता है।

4. वृद्ध श्राद्ध- विवाह, उत्सव आदि अवसरों पर वृद्धों के आशीर्वाद लेने हेतु किया जाने वाला श्राद्ध वृद्ध श्राद्ध कहलाता है। दांपत्य जीवन को सफल बनाने के लिए यह श्राद्ध करना चाहिए।

5. सपिंडित श्राद्ध- यह श्राद्ध सम्मान हेतु किया जाता है। समाज में, घर में और रिश्तेदारों में अपना सम्मान बनाए रखने के लिए यह श्राद्ध करना चाहिए।

6. पार्वण श्राद्ध- मंत्रों से पर्वों पर किया जाने वाला श्राद्ध पार्वण श्राद्ध है, जैसे अमावस्या आदि पर्वों पर किया जाने वाला श्राद्ध। इसे करने से घर में खुशियों का आगमन होता है।

7. गोष्ठ श्राद्ध- गौशाला में किया जाने वाला गोष्ठ श्राद्ध कहलाता है। इसे करने से स्त्री सुख की प्राप्ति होती है।

8. शुद्धि श्राद्ध- अपनी शुद्धि कराने के लिए जो श्राद्ध किया जाता है, वह शुद्धि श्राद्ध कहलाता है। इसे करने से ऑफिस में बैक बाइटिंग से बचाव होता है।

9. कर्मांग श्राद्ध- आने वाली संतति के लिए गर्भाधान, सोमयाग, सीमान्तोन्नयन आदि जो संस्कार किये जाते हैं, उन्हें कर्मांग श्राद्ध कहते हैं। इसे करने से बुढ़ापे में संतान आपका सहारा बनाती है, आपका ख्याल रखती है।

10. दैविक श्राद्ध- देवताओं को प्रसन्न करने के उद्देश्य से दैविक श्राद्ध किया जाता है। इसे करने से आपको अन्न-धन्न की कभी कमी नहीं होती।

11. यात्रार्थ श्राद्ध- यात्रा के उद्देश्य से किया जाने वाला श्राद्ध यात्रार्थ श्राद्ध कहलाता है। तीर्थ में जाने के उद्देश्य से या देशान्तर जाने के उद्देश्य से जिस श्राद्ध को सम्पन्न कराना चाहिए, वह यात्रार्थ श्राद्ध है। इसे करने से आपकी हर बिजनेस यात्रा सफल होती है।

12. पुष्टि श्राद्ध- देशान्तर में जाने वाले की पुष्टि के लिए जो शुभकामना की जाती है, उसके लिए जो दान पुण्य आदि किया जाता है उसे पुष्टि श्राद्ध कहते हैं। अपने मित्र, भाई, बहन, पति, पत्नी आदि की भलाई के लिए जो कर्म किये जाते हैं उन सबको पुष्टि श्राद्ध कहते हैं। इसे करने से विदेश जाने का अवसर मिलता है और जो पहले से विदेश में हैं, उन्हें लगातार अपने कामों में सफलता मिलती है।

(आचार्य इंदु प्रकाश देश के जाने-माने ज्योतिषी हैं, जिन्हें वास्तु, सामुद्रिक शास्त्र और ज्योतिष शास्त्र का लंबा अनुभव है। इंडिया टीवी पर आप इन्हें हर सुबह 7.30 बजे भविष्यवाणी में देखते हैं।)

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