अब सभी की नजरें कल होने वाले निर्णायक मैच पर टिकी हैं। भारत ने 22 अक्तूबर को चौथे एकदिवसीय मैच में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ 35 रन की आसान जीत दर्ज की थी और अब टीम कल इस लय को बरकरार रखने की कोशिश करेगी।
भारत ने यहां वानखेड़े स्टेडियम में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ अब तक तीनों मुकाबले जीते हैं जिससे कागजों पर मेजबान टीम का पलड़ा भारी नजर आता है। भारत ने 1996 में दो बार जबकि नवंबर 2005 में भी दक्षिण अफ्रीका को इस मैदान पर हराया था।
दोनों टीमें अपने मुख्य खिलाडि़यों की चोटों की समस्या से जूझ रही हैं। भारत के टॉप आफ स्पिनर रविचंद्रन अश्विन कानपुर में पहले वनडे में चोट लगने के बाद से बाहर हैं लेकिन हरभजन सिंह ने काफी हद तक उनकी कमी की भरपाई कर दी है।
दक्षिण अफ्रीका के आलराउंडर ज्यां पाल डूमिनी को 18 अक्तूबर को राजकोट में तीसरे वनडे के दौरान हाथ में चोट लगी थी जिसके कारण वह पिछले मैच में नहीं खेल पाए। राजकोट में ही 39 रन देकर चार विकेट चटकाते हुए दक्षिण अफ्रीका की जीत में अहम भूमिका निभाने वाले तेज गेंदबाज मोर्ने मोर्कल भी चेन्नई में नहीं खेल पाए और टीम को उनकी कमी काफी खली।
मोर्कल की जगह खेलने वाले क्रिस मौरिस उतने प्रभावी नहीं दिखे। वह ना तो मोर्कल की तरह रन गति में विराम लगा पाए और ना ही विकेट हासिल करने में उतने प्रभावी दिखे।
मोर्कल का अंतिम मैच में खेलना भी संदिग्ध है क्योंकि मेहमान टीम पांच नवंबर से मोहाली में शुरू हो रही टेस्ट श्रृंखला के लिए उन्हें पूरी तरह फिट देखना चाहती है।
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